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भारत ने अग्नि-5 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया

भारत ने 20 अगस्त को अग्नि-5 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया था. यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण केंद्र से किया गया था. यह परीक्षण सामरिक बल कमान के तत्वावधान में किया गया था.

अग्नि-5: मुख्य तथ्य

  • अग्नि-5 मध्यम दूरी की सतह-से-सतह पर मार करने वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है. यह परमाणु और पारंपरिक दोनों प्रकार के वारहेड ले जाने में सक्षम है.
  • इसकी मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर है. यानी यह मिसाइल एशिया महाद्वीप के लगभग सभी देशों और यूरोप के कुछ हिस्सों तक आसानी से पहुंच सकती है.
  • इसका विकास रक्षा अनुसन्धान एवं विकास संगठन ने किया है. यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है. सड़क-गतिशील (रोड-मोबाइल) लॉन्चर से भी दागी जा सकती है.

अग्नि श्रृंखला

  • अग्नि श्रृंखला भारत की परमाणु-सक्षम मिसाइलों का मुख्य आधार है. सबसे पहली अग्नि-1 की मारक क्षमता 700 किमी थी.
  • इसके बाद अग्नि-2 (2,000 किमी), अग्नि-3 (3,500 किमी) और अग्नि-4 (4,000 किमी) विकसित की गईं.
  • अग्नि-5 इस श्रृंखला की सबसे उन्नत मिसाइल है. अग्नि-5 मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) तकनीक से लैस है, जिससे यह एक ही प्रक्षेपण में कई लक्ष्यों पर वार कर सकती है.

अग्नि-2 मिसाइल का सफल परीक्षण: पहली बार अत्याधुनिक मिसाइल का रात में परीक्षण किया गया

भारत ने 16 नवम्बर को अग्नि-2 बलिस्टिक मिसाइल का रात में सफल परीक्षण किया. यह परीक्षण ओडिशा तट के पास (चांदीपुर परीक्षण केंद्र) ‘डॉ अब्दुल कलाम द्वीप’ पर एकीकृत परीक्षण (ITR) रेंज के प्रक्षेपण परिसर-4 में एक मोबाइल लॉन्चर से किया गया. ‘डॉ अब्दुल कलाम द्वीप’ को पहले व्हीलर आईलैंड के नाम से जाना जाता था. यह पहला मौका था, जब भारत ने रात के वक्त किसी अत्याधुनिक मिसाइल का परीक्षण किया है.

अग्नि-2 मिसाइल: एक दृष्टि

  • ‘अग्नि-2’ इंटरमीडिएट रेंज बलिस्टिक मिसाइल (IRBM) है. यह सतह से सतह पर मार करने में सक्षम है.
  • इस मिसाइल की मारक क्षमता 2000 किमी है, जरूरत पर 3,000 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है.
  • न्यूक्लियर हथियारों को ले जाने में सक्षम इस मिसाइल को पहले ही सशस्त्र बलों में शामिल किया जा चुका है.
  • इसकी लंबाई लगभग 20 मीटर है और यह 1000 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने में भी सक्षम है.
  • दो स्टेज में अपना लक्ष्य हासिल करने वाली यह मिसाइल ‘सॉलिड फ्यूल’ से चलती है.
  • इस मिसाइल को DRDO के अडवांस्ड सिस्टम्स लैबोरेटरी ने तैयार किया है.