लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव
भारतीय संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिया गया. यह प्रस्ताव विपक्षी दलों द्वारा लाया गया था. भारत के संसदीय इतिहास में लगभग चार दशकों के बाद किसी लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ इस तरह का प्रस्ताव लाया गया था.
राजनीतिक और संसदीय घटनाक्रम
- कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने विपक्षी गठबंधन (INDIA ब्लॉक) की ओर से यह अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था, जिस पर 100 से अधिक विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर थे.
- संविधान के अनुच्छेद 94(c) के तहत इसका पहला नोटिस 10 फरवरी 2026 को दिया गया था.
- विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया था.
- संसदीय परंपराओं के अनुसार, जब अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होती है, तो वह सदन की अध्यक्षता नहीं करते.
- इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन का संचालन बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने किया.
- 11 मार्च को सदन में यह प्रस्ताव मतदान के लिए रखा गया. यह अविश्वास प्रस्ताव ध्वनि मत से पूरी तरह खारिज हो गया.
लोकसभा अध्यक्ष को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 94(c) लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को उनके पद से हटाने की स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित करता है.
- अध्यक्ष को हटाने के प्रस्ताव से पहले कम 14 दिन का लिखित पूर्व नोटिस दिया जाता है. इस प्रस्ताव पर सदन में चर्चा के लिए कम से कम 50 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होती है.
- इस प्रस्ताव को लोकसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत द्वारा पारित होना चाहिए.
- इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अध्यक्ष के पास उन्हें सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने और अपने बचाव में बोलने का पूरा अधिकार होता है. वे इस प्रस्ताव पर मतदान कर सकते हैं.
- अगर पक्ष और विपक्ष के वोट बराबर (Tie) हो जाते हैं, तो उनके पास ‘निर्णायक वोट’ डालने का अधिकार नहीं होता.
