एशिया-अफ्रीका एग्री अलायंस की आधिकारिक शुरुआत
एशिया और अफ्रीका के बीच कृषि सहयोग, व्यापार और तकनीकी आदान-प्रदान को मजबूत करने के लिए नई दिल्ली में एशिया-अफ्रीका एग्री अलायंस (AAAA) की आधिकारिक तौर पर शुरुआत की गई है.
इसकी शुरुआत 13 और 14 मार्च 2026 को गुरुग्राम (हरियाणा) में आयोजित ‘मेज एंड मिलेट समिट’ (Maize & Millet Summit) और ‘एग्री एंड बायोवेस्ट कॉन्क्लेव 2026’ के दौरान हुआ था.
एशिया-अफ्रीका एग्री अलायंस क्या है?
- एशिया-अफ्रीका एग्री अलायंस (AAAA) को भारत में कंपनी अधिनियम की ‘धारा 8’ (Section 8) के तहत एक गैर-लाभकारी संस्था के रूप में स्थापित किया गया है.
- इसका मुख्य उद्देश्य एशिया और अफ्रीका के बीच कृषि व्यापार, निवेश, तकनीकी आदान-प्रदान और नीतिगत सहयोग को मजबूत करने के लिए एक ढांचा तैयार करना है.
- यह सरकारों, कृषि व्यवसायों, निवेशकों और विकास संस्थाओं के बीच एक ‘पुल’ (Bridge) की तरह काम करेगा.
AAAA की आवश्यकता और महत्व
- एशिया और अफ्रीका के बीच कृषि क्षेत्र में यह सहयोग वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है.
- दोनों महाद्वीप मिलकर वैश्विक कृषि उत्पादन का 40% से अधिक हिस्सा बनाते हैं. इन दोनों क्षेत्रों के बीच द्विपक्षीय कृषि व्यापार पहले से ही 90 बिलियन डॉलर प्रति वर्ष से अधिक का है.
- अफ्रीका के पास दुनिया की बची हुई कुल कृषि योग्य भूमि का लगभग 65% हिस्सा है और एक युवा कार्यबल है. दूसरी ओर, एशिया के पास उन्नत कृषि प्रसंस्करण तकनीकें, मजबूत सप्लाई चेन और बड़े उपभोक्ता बाजार हैं. यह अलायंस इन दोनों ताकतों को आपस में जोड़ेगा.
गठबंधन के पांच प्रमुख स्तंभ
- दोनों क्षेत्रों के बीच कृषि व्यापार को आसान बनाना और नए बाजारों तक पहुंच देना.
- आधुनिक खेती की तकनीकें, डिजिटल टूल्स और जलवायु-अनुकूल बीजों को साझा करना.
- कृषि-बुनियादी ढांचे (Agri-infrastructure) में निवेश के प्रवाह को बढ़ाना.
- कृषि कूटनीति को बढ़ावा देना और नीतियों में तालमेल बिठाना.
- ज्ञान के आदान-प्रदान के जरिए किसानों और एग्री-स्टार्टअप्स की मदद करना.
भारत की भूमिका
- भारत की मेजबानी और अगुवाई में बना यह गठबंधन ‘दक्षिण-दक्षिण सहयोग’ (South-South Cooperation) को मजबूत करने और दुनिया की भावी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक कदम है.
