भारत-चीन शाकगाम घाटी विवाद: हालिया घटनाक्रम

हाल ही में शाकगाम घाटी (Shaksgam Valley) में चीन द्वारा बुनियादी ढांचे के निर्माण को लेकर भारत और चीन के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है.

हालिया घटनाक्रम

  • 12 जनवरी 2026 को चीनी विदेश मंत्रालय ने भारत की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि शाकगाम घाटी चीन का हिस्सा है और वहां निर्माण कार्य करना उनका अधिकार है.
  • भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) और थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 13 जनवरी 2026 को स्पष्ट किया कि भारत 1963 के चीन-पाकिस्तान समझौते को अवैध मानता है.
  • भारत ने चेतावनी दी है कि वह अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है.

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (1963 का समझौता)

  • शाकगाम घाटी लगभग 5,180 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र है, जो काराकोरम पर्वतमाला के उत्तर में स्थित है.
  • यह क्षेत्र मूल रूप से जम्मू-कश्मीर का हिस्सा था. 1947-48 के युद्ध के बाद यह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) का हिस्सा बना.
  • चीन-पाक सीमा समझौता (1963): 1963 में पाकिस्तान ने अवैध रूप से इस भारतीय क्षेत्र को चीन को सौंप दिया.
  • भारत ने इस समझौते को कभी मान्यता नहीं दी और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन मानता है.
  • इस समझौते में एक विशेष शर्त थी कि कश्मीर विवाद के अंतिम समाधान के बाद, संप्रभु प्राधिकारी (जो भी उस समय वहां होगा) चीन के साथ सीमा पर फिर से बातचीत करेगा.

रणनीतिक महत्व

  • शाकगाम घाटी का विवाद केवल भूमि का नहीं, बल्कि रणनीतिक स्थिति का है. यह घाटी दुनिया के सबसे ऊँचे युद्धक्षेत्र ‘सियाचिन ग्लेशियर’ के ठीक उत्तर में स्थित है. यहाँ चीन की मौजूदगी भारत के लिए दोहरे मोर्चे (Two-front war) का खतरा पैदा करती है.
  • चीन यहाँ सड़कें बना रहा है ताकि वह अपने शिनजियांग प्रांत को PoK के माध्यम से पाकिस्तान से बेहतर तरीके से जोड़ सके. यह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का ही एक हिस्सा है.
  • हालिया रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने अघिल दर्रे के माध्यम से निचली शाकगाम घाटी तक सड़क पहुँचा दी है, जिससे भारतीय सेना की निगरानी की जा सकती है.

भारत का पक्ष

  • भारत का मानना है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख (जिसमें शाकगाम और अक्साई चिन शामिल हैं) भारत का अभिन्न अंग है.
  • भारत का तर्क है कि पाकिस्तान के पास उस क्षेत्र को किसी तीसरे देश को सौंपने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था, क्योंकि वह स्वयं वहां एक ‘अवैध कब्जाधारी’ है.