भारत-वाइमर प्रारूप की पहली बैठक पेरिस में आयोजित की गई

भारत-वाइमर प्रारूप (India-Weimar Format) की पहली ऐतिहासिक बैठक 7 जनवरी 2026 को फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित की गई थी.

भारत-वाइमर प्रारूप की बैठक: मुख्य बिन्दु

  • भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वाइमर त्रिकोण (Weimar Triangle) के सदस्य देशों—फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड—के अपने समकक्षों के साथ इस चर्चा में भाग लिया.
  • यह पहली बार था जब भारत ने इस यूरोपीय समूह (वाइमर त्रिकोण) के साथ ‘3+1’ के प्रारूप में बातचीत की.
  • 35 साल के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी गैर-यूरोपीय देश को इस प्रारूप में आमंत्रित किया गया.
  • बैठक के दौरान मुख्य रूप से तीन विषयों पर चर्चा हुई:
  1. भारत-यूरोपीय संघ (EU) संबंध विशेष रूप से आगामी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर चर्चा.
  2. हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करना.
  3. वैश्विक सुरक्षा और शांति पर इसके प्रभावों पर विचार-विमर्श.

इस बैठक के रणनीतिक मायने

  • इंडो-पैसिफिक: फ्रांस और जर्मनी दोनों की इंडो-पैसिफिक नीतियां हैं. भारत के साथ इनका जुड़ना चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करता है.
  • सुरक्षा और रक्षा: पोलैंड की बढ़ती सैन्य ताकत और जर्मनी-फ्रांस की तकनीक भारत के रक्षा विनिर्माण (Defense Manufacturing) के लिए महत्वपूर्ण है.
  • यूक्रेन संघर्ष: पोलैंड की भौगोलिक स्थिति के कारण, इस बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध और उसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पर भी चर्चा की गई.
  • टेक्नोलॉजी: सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा (Green Energy) और एआई (AI) पर सहयोग.

वाइमर त्रिकोण (Weimar Triangle) क्या है?

  • ‘वाइमर त्रिकोण’ फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड के बीच एक क्षेत्रीय समूह है.
  • इसकी स्थापना 1991 में पोलैंड के शहर ‘वाइमर’ में हुई थी.
  • इसका उद्देश्य यूरोपीय एकीकरण और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना है.
  • भारत-वाइमर प्रारूप (India-Weimar Format)
  • यह पहली बार है जब भारत इन तीन यूरोपीय शक्तियों (फ्रांस, जर्मनी, पोलैंड) के साथ एक साथ ‘3+1’ के प्रारूप में जुड़ रहा है.
  • यह बैठक भारत की यूरोप के साथ बढ़ती रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक राजनीति में भारत के बढ़ते कद को दर्शाती है.