ग्रीनलैंड ने अमेरिकी नियंत्रण के प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से अस्वीकार किया
ग्रीनलैंड के नेताओं ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा द्वीप पर नियंत्रण हासिल करने के प्रस्ताव को स्पष्ट शब्दों में अस्वीकार कर दिया है. यह घटनाक्रम 12-13 जनवरी 2026 के अंतरराष्ट्रीय समाचारों में प्रमुखता से सुर्खियों में रहा है.
अमेरिका का प्रस्ताव
- राष्ट्रपति ट्रंप ने 9 जनवरी 2026 को एक बैठक के दौरान ग्रीनलैंड को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के लिए महत्वपूर्ण बताया था.
- ट्रंप ने कहा कि वह ग्रीनलैंड के साथ सहमति से सौदा करना चाहते हैं, लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ, तो वे ‘कठिन रास्ते’ का उपयोग करेंगे.
- अमेरिका का तर्क है कि यदि वे ग्रीनलैंड पर नियंत्रण नहीं करते हैं, तो रूस या चीन इस रणनीतिक क्षेत्र में अपना कब्जा जमा सकते हैं.
- व्हाइट हाउस ने यह भी संकेत दिया कि वे नियंत्रण पाने के लिए सैन्य बल के विकल्प को भी खारिज नहीं कर रहे हैं.
ग्रीनलैंड का आधिकारिक बयान
- ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक निल्सन (Jens-Frederik Nielsen) और चार अन्य प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर अमेरिकी प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया.
- नेताओं ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड का भविष्य केवल वहां के लोग तय करेंगे और किसी अन्य देश को इसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है.
- उन्होंने जोर दिया कि किसी भी प्रकार का नियंत्रण अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन होगा.
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
- डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन (Mette Frederiksen) ने इस प्रस्ताव को ‘असंगत’ बताया और चेतावनी दी कि यदि अमेरिका जबरन कब्जा करने की कोशिश करता है, तो यह NATO (नाटो) गठबंधन का अंत होगा.
- जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों ने भी डेनमार्क और ग्रीनलैंड की संप्रभुता का समर्थन किया है.
ग्रीनलैंड का रणनीतिक महत्व
- ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र में स्थित दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है. यहाँ भारी मात्रा में दुर्लभ खनिज (Rare Earth Minerals), तेल और गैस के भंडार हैं.
- जलवायु परिवर्तन के कारण जैसे-जैसे बर्फ पिघल रही है, यहाँ नए व्यापारिक मार्ग और संसाधन सुलभ हो रहे हैं, जिसके कारण अमेरिका, रूस और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है.
