डेली कर्रेंट अफेयर्स
शांति का नोबेल पुरस्कार 2020 ‘विश्व खाद्य कार्यक्रम’ को प्रदान किया गया
वर्ष 2020 के लिए शांति का नोबेल पुरस्कार ‘विश्व खाद्य कार्यक्रम’ (World Food Programme) को प्रदान किया गया है. विश्व खाद्य कार्यक्रम को यह पुरस्कार संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में शांति के लिए बेहतर परिस्थितियों में योगदान देने के लिए दिया गया है. इसने युद्ध क्षेत्रों में भूखमरी को रोकने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
RBI द्विमासिक मौद्रिक नीति समिति की बैठक, नीतिगत दरों में कोई परिवर्तन नहीं करने का निर्णय
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 7-9 अक्टूबर को मुंबई में हुई. यह चालू वित्त वर्ष (2020-21) की चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक थी. इस बैठक में समिति ने नीतिगत दरों में कोई परिवर्तन नहीं करने का निर्णय लिया है.
इस बैठक में RBI ने रेपो दर को 4 प्रतिशत और बैंक दर को 4.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है. RBI ने चालू वित्त वर्ष में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) दर में 9.5 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान लगाया है.
रेपो रेट कम होने से कैसे लोगों को होता है फायदा?
रेपो रेट के कम होने से बैंकों को RBI से कम व्याज पर कर्ज मिलता है. इस सस्ती लागत का लाभ कर्ज लेने वाले ग्राहकों को मिलता है. इससे बैंकों को घर, दुकान, पर्सनल और कार के लिये लोन कम दरों पर देने का मौका मिलता है. ग्राहकों के चल रहे लोन पर EMI का भी कम होता है.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI): एक दृष्टि
- भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) भारत का केन्द्रीय बैंक है. यह भारत के सभी बैंकों का संचालक है.
- RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को RBI ऐक्ट 1934 के अनुसार हुई. प्रारम्भ में इसका केन्द्रीय कार्यालय कोलकाता में था जो सन 1937 में मुम्बई आ गया.
- पहले यह एक निजी बैंक था किन्तु सन 1949 से यह भारत सरकार का उपक्रम बन गया है.
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत अनिवार्य रूप से मौद्रिक नीति के संचालन की जिम्मेदारी सौपीं गई है.
वर्तमान दरें: एक दृष्टि
| नीति रिपो दर | 4% |
| रिवर्स रेपो दर | 3.35% |
| सीमांत स्थायी सुविधा दर (MCF) | 4.25% |
| बैंक दर | 4.25% |
| नकद आरक्षित अनुपात (CRR) | 3% |
| वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) | 18% |
क्या होता है रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, सीआरआर और एसएलआर?
9 अक्टूबर: विश्व डाक दिवस से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी
प्रत्येक वर्ष 9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस (World Post Day) मनाया जाता है. विश्व डाक दिवस का उद्देश्य लोगों के रोजमर्रा के जीवन में डाक की भूमिका के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक विकास में इसके योगदान के प्रति जागरूकता लाना है.
विश्व डाक दिवस यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन की स्थापना की स्मृति में मनाया जाता है. 1874 में इसी दिन यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (UPU) का गठन करने के लिए स्विट्जरलैंड की राजधानी बर्न में 22 देशों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इसके बाद वर्ष 1969 में जापान के टोक्यो में हुए सम्मेलन में विश्व डाक दिवस के रूप में 9 अक्टूबर को चयन किए जाने की घोषणा हुई.
भारतीय डाक सेवा: महत्वपूर्ण तथ्य
- भारत 1 जुलाई 1876 को भारत यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन का सदस्य बनने वाला पहला एशियाई देश था.
- भारत में आधुनिक डाक व्यवस्था की शुरुआत 1766 में लॉर्ड क्लाइव ने की थी. इका विकास वारेन हेस्टिंग्स ने 1774 में कोलकाता जनरल पोस्ट ऑफिस (GPO) की स्थापना करके किया. चेन्नै और मुंबई के GPO क्रमश: वर्ष 1786 और 1793 में अस्तित्व में आए.
- 1 अक्टूबर, 1854 को भारत सरकार ने डाक के लिए एक विभाग की स्थापना की थी. भारतीय डाक विभाग पिनकोड (पोस्टल इंडेक्स नंबर) के आधार पर देश में डाक वितरण का काम करता है. पिनकोड की शुरुआत 15 अगस्त, 1972 को गई थी.
केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का निधन
केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का 8 अक्टूबर को निधन हो गया. वे 74 वर्ष के थे और केंद्र सरकार में उपभोक्ता कार्य, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री थे. उन्होंने ग़रीब, वंचित तथा शोषित के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया था.
रामविलास पासवान ने लोक जनशक्ति पार्टी की संस्थापक सदस्य थे. वह आठ बार लोकसभा के लिए चुने गए. वे श्री जयप्रकाश नारायण के प्रबल अनुयायी थे. वे लोकदल के महासचिव भी बने. पासवान ने केंद्रीय मंत्री के रूप में सभी राष्ट्रीय गठबंधन के पांच प्रधानमंत्रियों के अधीन काम किया है.
