डेली कर्रेंट अफेयर्स
मालदीव की मदद के लिए भारतीय वायुसेना ने ‘ऑपरेशन संजीवनी’ चलाया
मालदीव की मदद के लिए भारतीय वायुसेना ने हाल ही में ‘ऑपरेशन संजीवनी’ (Operation Sanjeevani) चलाया था. इस ऑपरेशन के द्वारा इंडियन एयर फोर्स और इंडियन आर्मी ने मिलकर मालदीव का भारत में फंसा 6.2 टन का सामान उन तक पहुंचाया. यह सामान एयर फोर्स के C-130 एयरक्राफ्ट में लिफ्ट कर माले पहुंचाया गया.
क्या था मामला?
दरअसल भारत के अलग-अलग सप्लायर्स से ये सामान मालदीव जाना था लेकिन 21 दिन के लॉकडाउन की वजह से यह दवाई और सामान किसी और तरीके से मालदीव नहीं भेज सकते थे.
मालदीव सरकार के आग्रह पर इंडियन एयर फोर्स ने ऑपरेशन संजीवनी शुरू किया. इंडियन एयर फोर्स के विमान ने यह सामान नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नै, मदुरै के एयरपोर्ट से उठाया फिर माले के लिए उड़ान भरी. यह सामान 8 अलग-अलग सप्लायर्स के वेयरहाउस में थे.
जो सामान भेजा गया है उसमें बीपी, डायबिटीज, किडनी के मरीजों की दवाइयों से लेकर एंटी वायरल और इंफ्लुएंजा की वैक्सीन तक हैं. इसमें जरूरी दवाइयां और अस्तपाल के लिए जरूरी सामान थे. इसमें कैंसर से लेकर कोराना वायरस के मरीज के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाई भी हैं.
भारत और मालदीव के बीच चलाये गये मुख्य ऑपरेशन
2014 में ऑपरेशन नीर: मालदीव की राजधानी माले को गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ा था. भारतीय वायुसेना ने 374 टन पीने के पानी की आपूर्ति की थी.
1988 में ऑपरेशन कैक्टस: मालदीव सरकार का तख्तापलट की कोशिश को बेअसर करने में मदद के लिए भारतीय वायु सेना ने ऑपरेशन कैक्टस चलाया था.
मालदीव: एक दृष्टि
मालदीव (मालदीव गणराज्य) हिंद महासागर में स्थित एक द्वीपीय देश है. इसका फेलाव भारत के लक्षद्वीप की उत्तर-दक्षिण दिशा में है जो लक्षद्वीप सागर में स्थित है. श्रीलंका की दक्षिण-पश्चिमी दिशा से यह करीब 700 किलोमीटर (435 mi) पर है. मालदीव की राजधानी माले है. जनसंख्या और क्षेत्रफल दोनों के आधार पर मालदीव एशिया का सबसे छोटा देश है.
कोरोना वायरस से पीड़ितों के लिए देश में एक विशेष वैक्सीन ‘कोरोफ्लू’ तैयार की जा रही है
हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक कंपनी कोरोना वायरस से पीड़ितों के लिए नाक के जरिए ली जाने वाली एक विशेष वैक्सीन तैयार कर रही है. यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कांसिन मैडीसन और वैक्सान निर्माता कंपनी फ्लूजेन के वायरोलॉजिस्ट ने भारत बायोटेक के साथ मिलकर इस जानलेवा वायरस से लड़ने के लिए वैक्सीन बनाने का काम कर रही है.
वैक्सीन को ‘कोरोफ्लू’ नाम दिया गया
इस वैक्सीन को कोरोफ्लू नाम दिया गया है. कंपनी ने इसके निर्माण करने के लिए परीक्षण शुरू कर दिया है. कोरोफ्लू वैक्सीन, फ्लूजेन कंपनी की फ्लू वैक्सीन M2SR के आधार पर विकसित किया जा रहा है. उल्लेखनीय है फ्लू की M2SR वैक्सीन यूनिवर्सिटी आफ विस्कांसिन-मैडीसन के वाइरोलाजिस्ट और वैक्सीन निर्माता कंपनी फ्लूजेन के संस्थापकों योशिरो कावाओका व गैब्रियेल न्यूमैन ने ईजाद की थी.
एक बार तैयार होने के बाद इस वैक्सीन की एक बूंद कोरोना मरीजों की नाक में डाली जाएगी. यह वैक्सीन मनुष्यों के लिए पूरी तरह सुरक्षित होने का दावा किया गया है. भारत बायोटेक ने बताया है कि कोरोफ्लू वैक्सीन के विभिन्न परीक्षणों में तीन से छह माह का वक्त लग सकता है.
गौरतलब हो कि अभी तक कोई भी देश या संस्था इस जानलेवा वायरस से लड़ने के लिए कोई वैक्सीन तैयार नहीं कर पाया है. दुनियाभर की कंपनियां कोरोना की वैक्सीन बनाने में लगी हुई है.
7 अप्रैल: विश्व स्वास्थ्य दिवस
प्रत्येक वर्ष 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस (World Health Day) मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जानकारी और जागरूकता का प्रसार करना है.
विश्व स्वास्थ्य दिवस 2020 का विषय
इस वर्ष यानी 2020 में विश्व स्वास्थ्य दिवस का विषय (थीम)- सपोर्ट नर्सेस एवं मिडवाइव्स (Support Nurses And Midwives) है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सभी से नर्सिंग एवं मिडवाइफ कर्मियों को सशक्त बनाने की सहयोग देने का आह्वान किया है. 2019 में विश्व स्वास्थ्य दिवस का विषय- हेल्थ कवरेज: एवरीवन, एवरीवेयर (Health Coverage: Everyone Everywhere) था.
विश्व स्वास्थ्य दिवस का इतिहास
यह दिवस विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation-WHO) की स्थापना की वर्षगांठ के दिन मनाया जाता है. संयुक्त राष्ट्र ने 7 अप्रैल 1948 को WHO की स्थापना की थी. WHO ने 1948 में पहली बार जेनेवा में 7 अप्रैल को वार्षिक तौर पर विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाने का फैसला किया था. विश्व स्वास्थ्य दिवस के रुप में वर्ष 1950 में पूरे विश्व में इसे पहली बार मनाया गया था.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO): एक दृष्टि
- WHO संयुक्त राष्ट्र का हिस्सा है इसका मुख्य काम दुनियाभर में स्वास्थ्य समस्याओं पर नजर रखना और उन्हे सुलझाने में मदद करना है.
- WHO का मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जिनीवा शहर में है. स्थापना के समय इसके संविधान पर 61 देशों ने हस्ताक्षर किए थे. इसकी पहली बैठक 24 जुलाई 1948 को हुई थी.
- अपनी स्थापना के बाद से WHO ने स्मॉल पॉक्स बिमारी को खत्म करने में बड़ी भूमिका निभाई है. फिलहाल WHO एड्स, इबोला और टीबी जैसी खतरनाक बिमारियों की रोकथाम पर काम कर रहा है.
- WHO के वर्तमान डायरेक्टर जनरल ट्रेड्रॉस एडोनम है जिन्होंने अपना पांच वर्षीय कार्यकाल 1 जुलाई 2017 को शुरू किया था.
- दुनिया के 194 देश WHO के सदस्य हैं. WHO का मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जेनेवा शहर में है. भारत भी विश्व स्वास्थ्य संगठन का एक सदस्य देश है और इसका भारतीय मुख्यालय भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित है.
देश-दुनिया: एक दृष्टि
सामयिक घटनाचक्र डेलीडोज
भारत ने हाइड्रोक्सी क्लोरोक्विन निर्यात पर आंशिक प्रतिवंध हटाया: भारत उन पड़ोसी देशों को उचित मात्रा में पैरासिटामोल और हाइड्रोक्सी क्लोरोक्विन का लाइसेंस देगा, जो इसके लिए हमारी क्षमताओं पर निर्भर है. यह निर्णय कोविड-19 महामारी को देखते हुए मानवतावादी आधार पर लिया गया है. भारत ये आवश्यक दवाएं महामारी से बुरी तरह प्रभावित कुछ अन्य देशों को भी भेजेगा.
अभिनेता फॉरेस्ट कॉम्पटन का निधन: प्रसिद्ध अमेरिकी अभिनेता फॉरेस्ट कॉम्पटन का COVID-19 संक्रमित होने के कारण निधन हो गया. वह 94 वर्ष के थे. कॉम्पटन लंबे समय से चले ओपेरा “द एज ऑफ नाइट” में जिला वकील माइक कर्र की भूमिका निभाने के लिए लोकप्रिय थे.
‘लाइफलाइन उड़ान’ पहल: भारत सरकार कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए देशभर में मेडिकल सप्लाई की आपूर्ति के लिए ‘लाइफलाइन उड़ान’ पहल शुरू की है. ये उड़ानें देश के दूरदराज के हिस्सों में आवश्यक मेडिकल सप्लाई के परिवहन के लिए संचालित की जा रही हैं. इन उड़ानों को एयर इंडिया, एलायंस एयर, भारतीय वायुसेना, पवन हंस और निजी वाहक द्वारा संचालित किया गया है.
2019-20 में सर्वाधिक राजमार्गों का निर्माण: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने वित्तीय वर्ष 2019-20 में 3,979 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया है. यह किसी भी वित्तीय वर्ष में NHAI द्वारा किया गया सबसे अधिक राजमार्ग निर्माण है.
