डेली कर्रेंट अफेयर्स
26 अप्रैल: विश्व बौद्धिक सम्पदा दिवस
प्रत्येक वर्ष 26 अप्रैल को विश्व-भर में विश्व बौद्धिक सम्पदा दिवस (World Intellectual Property Day) मनाया जाता है. इसी दिन 1970 में विश्व बौद्धिक संपदा संगठन की स्थापना के लिए समझौता लागू हुआ था. इस दिवस को मनाये जाने का उद्देश्य बौद्धिक संपदा के अधिकारों (पेटेंट, ट्रेडमार्क, औद्योगिक डिजाइन, कॉपीराइट इत्यादि) के प्रति लोगों को जागरूक करना है.
बौद्धिक संपदा क्या है?
मानव बुद्धि से निर्मित रचनाएं बौद्धिक संपदा कहलाती है, जिन्हें छूकर महसूस नहीं किया जा सकता. इनमें मुख्य रूप से कॉपीराइट, पेटेंट और ट्रेडमार्क शामिल हैं. इनके अलावा ट्रेड सीक्रेट्स, प्रचार अधिकार, नैतिक अधिकार और अनुचित प्रतिस्पर्द्धा के खिलाफ अधिकार भी इसमें शामिल हैं.
विश्व बौद्धिक सम्पदा दिवस 2020 का विषय
इस वर्ष यानी 2020 के विश्व बौद्धिक सम्पदा अधिकार दिवस का मुख्य विषय (थीम)– Innovate for a Green Future है.
विश्व बौद्धिक सम्पदा दिवस का इतिहास
संयुक्त राष्ट्र के विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) ने वर्ष 2000 में प्रतिवर्ष 26 अप्रैल को इस दिवस को मनाने की घोषणा की थी. WIPO की स्थापना 14 जुलाई, 1967 को हुई थी.
विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO)
WIPO का कार्य बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा तथा संवर्द्धन करना है. वर्तमान में भारत सहित इसके कुल 191 सदस्य देश हैं. इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में है. भारत 1975 में WIPO का सदस्य बना था.
राष्ट्रीय बौद्धिक सम्पदा अधिकार नीति
भारत ने राष्ट्रीय बौद्धिक सम्पदा अधिकार नीति 2016 में स्वीकार की थी. जिसका मुख्य उद्देश्य बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है.
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 28 लोगों से जन सुरक्षा कानून हटाया
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने केन्द्र शासित प्रदेश और उससे बाहर जेलों में बंद 28 लोगों से जन सुरक्षा कानून (PSA) हटा दिया है.
केन्द्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा वापस लेकर उसे दो केन्द्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था. इसके बाद मुख्यधारा के नेताओं समेत राज्य में सैकड़ों लोगों को पीएसए कानून के तहत हिरासत में ले लिया गया था.
क्या है जन सुरक्षा अधिनियम (PSA)?
जन सुरक्षा अधिनियम या कानून (PSA) उन लोगों पर लगाया जा सकता है, जिन्हें सुरक्षा और शांति के लिए खतरा माना जाता हो. 1978 में शेख अब्दुल्ला ने इस कानून को लागू किया था. 2010 में इसमें संशोधन किया गया था, जिसके तहत बगैर ट्रायल के ही कम से कम 6 महीने तक जेल में रखा जा सकता है. राज्य सरकार चाहे तो इस अवधि को बढ़ाकर दो साल तक भी किया जा सकता है.
‘प्लाज़्मा थैरेपी’ से ‘कोविड-19’ का उपचार, जानिए क्या है प्लाज़्मा थैरेपी
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने कोविड-19 के उपचार के लिए रोग मुक्त करने वाली ‘प्लाज़्मा थैरेपी’ (Plasma Therapy) को स्वीकृति दी है. इसका उद्देश्य उपचार के बाद कोविड-19 से पूरी तरह ठीक हुए व्यक्ति के खून के प्लाज्मा का उपयोग रोगियों के इलाज के लिए किया जाता है. इस थैरेपी में प्लाज्मा में मौजूद एंटीबॉडी के आधार पर रोगी व्यक्ति में वायरस रोधी क्षमता विकसित की जाती है. चीन और दक्षिण कोरिया में इस इलाज का इस्तेमाल हो रहा है.
श्री चित्रा तिरूनल आयुर्विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान को उपचार की स्वीकृति
ICMR ने केरल में श्री चित्रा तिरूनल आयुर्विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान को ‘प्लाज़्मा थैरेपी’ से कोरोना वायरस से संक्रमित रोगियों के उपचार की स्वीकृति दी थी. तिरूअनंतपुरम में यह संस्थान केंद्र सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है.
प्लाज़्मा थैरेपी (Plasma Therapy): एक दृष्टि
- वे मरीज़ जो किसी कोरोना वायरस संक्रमण (कोविड-19) से उबर जाते हैं उनके शरीर में संक्रमण को बेअसर करने वाले प्रतिरोधी ऐंटीबॉडीज़ विकसित हो जाते हैं. इन ऐंटीबॉडीज़ की मदद से कोविड-19 के रोगी के रक्त में मौजूद वायरस को ख़त्म किया जा सकता है.
- ठीक हो चुके मरीज़ का ELISA (The enzyme-linked immunosorbent assay) टेस्ट किया जाता है जिससे उसके शरीर में ऐंटीबॉडीज़ की मात्रा का पता लगता है.
- फिर इस ठीक हो चुके रोगी के शरीर से ऐस्पेरेसिस विधि से ख़ून निकाला जाता है जिसमें ख़ून से प्लाज़्मा या प्लेटलेट्स जैसे अवयवों को निकालकर बाक़ी ख़ून को फिर से उसी रोगी के शरीर में वापस डाल दिया जाता है. ऐंटीबॉडीज़ केवल प्लाज़्मा में मौजूद होते हैं.
- डोनर के शरीर से लगभग 800 मिलीलीटर प्लाज़्मा लिया जाता है. इसमें से संक्रमित रोगी को लगभग 200 मिलीलीटर ख़ून चढ़ाने की ज़रूरत होती है. यानी एक डोनर के प्लाज़्मा का चार रोगियों में इस्तेमाल हो सकता है.
- 18 साल से 55 साल का कोई भी पुरुष जो कोरोना से ठीक हो चुका है प्लाज्मा दे सकता है. सभी अविवाहित महिला या विवाहित लेकिन जिसके बच्चे ना हो ऐसी महिला प्लाज्मा दे सकती हैं.
देश-दुनिया: एक दृष्टि
सामयिक घटनाचक्र डेलीडोज
पेट्रो-रसायन उद्योग देश में पहली बार शीर्ष निर्यात क्षेत्र बना: भारत का रसायन निर्यात पिछले वित्त वर्ष के अप्रैल से जनवरी की अवधि के दौरान 7 प्रतिशत बढ़कर 2.68 लाख करोड़ रुपये का हो गया है. यह कुल निर्यात का 14.3 प्रतिशत है. रसायन और पेट्रो-रसायन उद्योग देश में पहली बार शीर्ष निर्यात क्षेत्र बन गया है.
