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पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष और ऑपरेशन एपिक फ्यूरी

पश्चिम एशिया (Middle East) में हाल के दिनों में स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण रहा है. अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए सैन्य अभियान, इस क्षेत्र में पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा सैन्य संघर्ष बन गया है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय (संयुक्त राष्ट्र सहित) तनाव कम करने के लिए बातचीत की कोशिश कर रहा है.

अमेरिका का सैन्य अभियान: ऑपरेशन एपिक फ्यूरी

  • संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ 28 फरवरी 2026 को एक सैन्य अभियान शुरू किया था.
  • अमेरिका ने इस अभियान का नाम ऑपरेशन एपिक फ्यूरी (Operation Epic Fury) और इज़राइल ने ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ (Operation Roaring Lion) दिया गया है.
  • अमेरिका और इज़राइल के अनुसार, इसका लक्ष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट करना, उसकी मिसाइल क्षमताओं को खत्म करना और शासन परिवर्तन करना है.
  • इस अभियान में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के मुख्यालय, बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स, परमाणु बुनियादी ढांचे और नौसैनिक अड्डों (जैसे बंदर अब्बास) पर भारी बमबारी की गई.
  • अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु: तेहरान में किए गए अमेरिका और इज़राइल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के परिसर को निशाना बनाया गया, जिसमें उनकी मृत्यु हो गई.

ईरान की जवाबी कार्रवाई: ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस IV

  • ईरान ने इस हमले के जवाब में ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस IV’ शुरू किया है, जिससे युद्ध पूरे पश्चिम एशिया में फैल गया है.
  • ईरान समर्थित समूहों और ईरानी मिसाइलों ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत, बहरीन और ओमान में अमेरिकी ठिकानों और नागरिक बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया है.
  • होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): ईरान ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को बंद करने की घोषणा की है, जिससे वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति पर गहरा संकट मंडरा रहा है. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा गया है.

भारत पर प्रभाव और चिंताएं

  • भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों के लिए काफी हद तक इसी क्षेत्र पर निर्भर है. आपूर्ति रुकने से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं.
  • खाड़ी देशों से आने वाले रेमिटेंस (विदेशी मुद्रा) और व्यापारिक मार्ग बाधित होने से अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है.
  • पश्चिम एशिया में लगभग 90 लाख भारतीय रहते हैं. उनकी सुरक्षा और संभावित निकासी (Evacuation) भारत सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है.

अमेरिका ने ‘इनॉग्रल क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टेरियल’ का सफल आयोजन किया

अमेरिका ने 4 फरवरी 2026 को वॉशिंगटन डीसी में ‘इनॉग्रल क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टेरियल’ (Inaugural Critical Minerals Ministerial) का सफल आयोजन किया था. यह बैठक दुनिया भर में महत्वपूर्ण खनिजों (जैसे लिथियम, कोबाल्ट, और दुर्लभ मृदा तत्व) की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित और विविध बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

इस बैठक का मुख्य उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों के खनन और प्रसंस्करण में चीन के प्रभुत्व को कम करना है. वर्तमान में, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और रक्षा प्रणालियों के लिए आवश्यक अधिकांश खनिजों की सप्लाई चेन पर चीन का नियंत्रण है.

बैठक के मुख्य बिन्दु

  • बैठक की अध्यक्षता अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने की. इस सम्मेलन में भारत सहित 54 देशों के प्रतिनिधियों और यूरोपीय आयोग ने हिस्सा लिया.
  • भारत का प्रतिनिधित्व: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इस बैठक में भाग लिया और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को ‘डी-रिस्किंग’ (जोखिम कम करने) और सुरक्षित बनाने पर जोर दिया.
  • अमेरिका ने अर्जेंटीना, ब्रिटेन, फिलीपींस, मोरक्को और उजबेकिस्तान सहित 11 देशों के साथ नए द्विपक्षीय फ्रेमवर्क साइन किए.
  • महत्वपूर्ण खनिजों की खोज, खनन और प्रसंस्करण के क्षेत्र में भारत के साथ द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने पर सहमति बनी.

प्रमुख पहलों की घोषणा

  1. प्रोजेक्ट ‘फोर्ज’ (FORGE): ‘फोरम ऑन रिसोर्स जियोस्ट्रेटेजिक एंगेजमेंट’ (FORGE) को खनिज सुरक्षा साझेदारी (MSP) के उत्तराधिकारी के रूप में लॉन्च किया गया. दक्षिण कोरिया जून 2026 तक इसकी अध्यक्षता करेगा.
  2. प्रोजेक्ट वॉल्ट (Project Vault): अमेरिका ने अपने घरेलू निर्माताओं को आपूर्ति अवरुद्ध होने से बचाने के लिए क्रिटिकल मिनरल्स का एक रणनीतिक भंडार बनाने के लिए 10 बिलियन डॉलर के ऋण की मंजूरी दी.
  3. ट्रेडिंग ब्लॉक का प्रस्ताव: बैठक में एक ऐसे व्यापारिक गुट बनाने पर चर्चा हुई जहाँ मित्र देश न्यूनतम मूल्य और टैरिफ के माध्यम से एक-दूसरे के साथ खनिजों का व्यापार कर सकें.

वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के लिए बोर्ड ऑफ पीस का गठन

अमेरिका ने वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के लिए बोर्ड ऑफ पीस (Board of Peace) नाम से एक नया अंतर्राष्ट्रीय संगठन का गठन किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावोस (Davos) में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान इसका अनावरण किया.

बोर्ड ऑफ पीस: मुख्य बिन्दु

उद्देश्य

  • इसकी शुरुआत मुख्य रूप से गाज़ा में युद्धविराम लागू करने और वहां के पुनर्निर्माण की निगरानी के लिए की गई है. यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 (2025) के अनुरूप है.
  • हालाँकि इसकी शुरुआत गाज़ा के लिए हुई थी, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ा दिया गया है. इसे संयुक्त राष्ट्र (UN) के एक प्रभावी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, जो वैश्विक संघर्षों को सुलझाने का काम करेगा.

संरचना और नेतृत्व

  • अमेरिकी राष्ट्रपति इसके स्थायी चेयरमैन हैं. उनके पास वीटो पावर है और वे बोर्ड के फैसलों को नियंत्रित कर सकते हैं.
  • इसमें एक एग्जीक्यूटिव बोर्ड होगा जिसमें ट्रम्प के करीबी और प्रमुख कूटनीतिज्ञ शामिल हैं, जैसे:
    • जेरेड कुशनर (ट्रम्प के दामाद)
    • मार्को रुबियो (अमेरिकी विदेश मंत्री)
    • टोनी ब्लेयर (ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री)

सदस्यता

  • इस बोर्ड में शामिल होने के लिए देशों को आमंत्रित किया गया है. स्थायी सदस्यता के लिए देशों को 1 बिलियन डॉलर (लगभग 8000 करोड़ रुपये) का योगदान देना होगा. बिना फीस के देश 3 साल के लिए अस्थायी सदस्य बन सकते हैं.
  • लगभग 20-30 देशों ने इसमें शामिल होने पर सहमति जताई है, जिनमें इजरायल, सऊदी अरब, मिस्र, अर्जेंटीना, तुर्की, पाकिस्तान और हंगरी जैसे देश शामिल हैं.
  • ब्रिटेन, फ्रांस और कुछ अन्य यूरोपीय देशों ने इसमें शामिल होने से मना कर दिया है क्योंकि वे इसे संयुक्त राष्ट्र की व्यवस्था को कमजोर करने वाला मानते हैं.
  • भारत ने भी अभी तक इसमें शामिल होने पर कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं दिखाई है.

ग्रीनलैंड ने अमेरिकी नियंत्रण के प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से अस्वीकार किया

ग्रीनलैंड के नेताओं ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा द्वीप पर नियंत्रण हासिल करने के प्रस्ताव को स्पष्ट शब्दों में अस्वीकार कर दिया है. यह घटनाक्रम 12-13 जनवरी 2026 के अंतरराष्ट्रीय समाचारों में प्रमुखता से सुर्खियों में रहा है.

अमेरिका का प्रस्ताव

  • राष्ट्रपति ट्रंप ने 9 जनवरी 2026 को एक बैठक के दौरान ग्रीनलैंड को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के लिए महत्वपूर्ण बताया था.
  • ट्रंप ने कहा कि वह ग्रीनलैंड के साथ सहमति से सौदा करना चाहते हैं, लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ, तो वे ‘कठिन रास्ते’ का उपयोग करेंगे.
  • अमेरिका का तर्क है कि यदि वे ग्रीनलैंड पर नियंत्रण नहीं करते हैं, तो रूस या चीन इस रणनीतिक क्षेत्र में अपना कब्जा जमा सकते हैं.
  • व्हाइट हाउस ने यह भी संकेत दिया कि वे नियंत्रण पाने के लिए सैन्य बल के विकल्प को भी खारिज नहीं कर रहे हैं.

ग्रीनलैंड का आधिकारिक बयान

  • ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक निल्सन (Jens-Frederik Nielsen) और चार अन्य प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर अमेरिकी प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया.
  • नेताओं ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड का भविष्य केवल वहां के लोग तय करेंगे और किसी अन्य देश को इसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है.
  • उन्होंने जोर दिया कि किसी भी प्रकार का नियंत्रण अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन होगा.

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

  • डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन (Mette Frederiksen) ने इस प्रस्ताव को ‘असंगत’ बताया और चेतावनी दी कि यदि अमेरिका जबरन कब्जा करने की कोशिश करता है, तो यह NATO (नाटो) गठबंधन का अंत होगा.
  • जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों ने भी डेनमार्क और ग्रीनलैंड की संप्रभुता का समर्थन किया है.

ग्रीनलैंड का रणनीतिक महत्व

  • ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र में स्थित दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है. यहाँ भारी मात्रा में दुर्लभ खनिज (Rare Earth Minerals), तेल और गैस के भंडार हैं.
  • जलवायु परिवर्तन के कारण जैसे-जैसे बर्फ पिघल रही है, यहाँ नए व्यापारिक मार्ग और संसाधन सुलभ हो रहे हैं, जिसके कारण अमेरिका, रूस और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है.

वेनेजुएला संकट: अमेरिकी सेना ने एक बड़ा ऑपरेशन संचालित किया

अमेरिका ने 3 जनवरी 2026 को वेनेजुएला में ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ (Operation Absolute Resolve) नाम से एक बड़ी सैन्य कार्रवाई की थी. इस घटना ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है.

ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व

  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के आदेश पर अमेरिकी विशेष बलों (Delta Force और Special Ops) ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास में एक गुप्त और तीव्र सैन्य अभियान ‘एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ चलाया.
  • अमेरिकी वायुसेना ने काराकास और उत्तरी वेनेजुएला के सैन्य ठिकानों पर बमबारी की. अमेरिकी बलों ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के निवास पर हमला कर उन्हें और उनकी पत्नी को हिरासत में ले लिया.
  • मादुरो के पकड़े जाने के बाद वर्तमान में अंतरिम व्यवस्था के तहत  नेतृत्व डेल्सी रोड्रिग्ज संभाल रहे हैं. वह वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति थीं.

अमेरिका में मुकदमे

  • निकोलस मादुरो को विमान से न्यूयॉर्क (अमेरिका) ले जाया गया, जहाँ उन पर ‘नार्को-टेररिज्म’ (नशीली दवाओं के आतंकवाद) और मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मुकदमे चलाए जा रहे हैं.
  • 5 जनवरी 2026 को उन्होंने अदालत में खुद को निर्दोष बताया है.

वेनेजुएला संकट की पृष्ठभूमि

  • वेनेजुएला में संकट कोई नया नहीं है, यह पिछले एक दशक से गहरा रहा है. दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार होने के बावजूद, कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के कारण यहाँ की अर्थव्यवस्था तबाह हो गई. यहाँ हाइपर-इन्फ्लेशन (अत्यधिक महंगाई) के कारण लोगों के पास खाने और दवाइयों की भारी कमी हो गई है.
  • 2024 के चुनावों के बाद मादुरो की जीत पर धांधली के आरोप लगे, जिसे अमेरिका और कई पश्चिमी देशों ने अवैध घोषित कर दिया था.
  • अमेरिका ने मादुरो सरकार पर दबाव बनाने के लिए उसके तेल निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे, जिससे वेनेजुएला की आय का मुख्य स्रोत बंद हो गया.

अमेरिका की कार्रवाई का कारण

  • अमेरिका का आरोप है कि मादुरो ‘कार्टेल डी लॉस सोल्स’ (Cartel de los Soles) नामक नशीली दवाओं के गिरोह के प्रमुख हैं, जो अमेरिका में फेंटानिल और कोकीन की तस्करी करते हैं.
  • अमेरिका वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर नियंत्रण स्थापित करना और वहां के बुनियादी ढांचे को अमेरिकी कंपनियों की मदद से सुधारना चाहता है.
  • अमेरिका वेनेजुएला में रूस, चीन और ईरान के बढ़ते प्रभाव को कम करना चाहता है.

भारत का रुख

  • भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की है. भारत ने स्पष्ट किया है कि वह वेनेजुएला के लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है और सभी पक्षों से बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की है.
  • भारत के वेनेजुएला के साथ पुराने ऊर्जा संबंध (तेल आयात) रहे हैं, इसलिए भारत इस स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है.

गजा में युद्ध समाप्त करने के लिए मिस्र में अंतर्राष्ट्रीय शांति शिखर सम्मेलन

मिस्र में 13 अक्टूबर 2025 को गाजा शांति शिखर सम्मेलन (Gaza Peace Summit) आयोजित किया गया था. इस सम्मेलन का उद्देश्य गाजा में लंबे समय से चल रहे संघर्ष को समाप्त करना और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करना था.

शिखर सम्मेलन के मुख्य बिंदु

  • उद्देश्य: गाजा में युद्ध को समाप्त करना, मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देना, क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक नए दौर की शुरुआत करना, हमास को निरस्त्र करना और पट्टी में एक नया शासी निकाय बनाना था.
  • मेजबानी: यह सम्मेलन मिस्र के शर्म अल-शेख शहर में आयोजित किया गया था. सम्मेलन की सह-अध्यक्षता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने की थी.
  • प्रतिभागी: इस सम्मेलन में भारत सहित 30 से अधिक देशों को आमंत्रित किया गया था. जिसमें संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इराक के प्रधानमंत्री, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फिलिस्तीनी अथॉरिटी के अध्यक्ष महमूद अब्बास शामिल थे. भारत का प्रतिनिधित्व विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने किया.
  • इजराइल और हमास ने इस सम्मेलन में भाग नहीं लिया. इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी शामिल नहीं हुए.
  • हमास की प्रतिक्रिया: हमास ने इस योजना को मानने से साफ इनकार कर दिया है और इसे बेतुका बताया है. हमास का कहना है कि वह अपने हथियार नहीं छोड़ेगा.
  • सम्मेलन में एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए गए, जिसमें गाजा में युद्ध समाप्त करने संबंधी समझौता शामिल था.

शांति योजना में शामिल मुद्दे

  • अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक 20-सूत्रीय योजना पेश की, जिसमें युद्धविराम, सेना की वापसी, बंधकों की रिहाई और स्थायी शांति जैसे मुद्दे शामिल थे.
  • पहला चरण: इजरायली सैनिकों की गाजा से वापसी, जीवित और मृत बंधकों की वापसी, और लगभग 2,000 फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई.
  • दूसरा चरण: गाजा का पुनर्निर्माण, अंतर्राष्ट्रीय स्थिरीकरण बल की तैनाती और हमास का निरस्त्रीकरण.
  • सम्मेलन से पहले ही हमास ने 20 जीवित बंधकों और इज़राइल ने सैकड़ों फिलिस्तीनी कैदियों को छोड़ दिया था.

अमरीका ने सर्गियो गोर को भारत का राजदूत नियुक्त किया

  • अमेरिकी ने सर्जियो गोर को भारत का राजदूत नियुक्त किया है. गोर, एरिक गार्सेटी का स्थान लेंगे, जिन्होंने 11 मई 2023 से इस वर्ष 20 जनवरी 2025 तक राजदूत के रूप में कार्य किया था. इसके बाद से भारत में अमेरिका का कोई राजदूत नहीं था.
  • सर्जियो गोर वर्तमान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन में ‘हेड ऑफ प्रेसिडेंशियल पर्सनल अपॉइंटमेंट्स’ हैं. गोर लंबे समय से ट्रंप के विश्वास-पात्र रहे हैं.
  • गोर की नियुक्ति भी ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिकी टैरिफ को लेकर गतिरोध बना हुआ है. वहीं, भारत का पाकिस्तान के साथ संबंध तनावपूर्ण हैं और चीन के साथ नजदीकियां बढ़ रही हैं.
  • सर्गियो गोर, भारत में अमेरिकी राजदूत के साथ-साथ दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के लिए विशेष दूत भी नियुक्त किया गया है.

राजदूत: एक दृष्टि

  • एक राजदूत किसी विदेशी देश में अपने देश के सर्वोच्च राजनयिक प्रतिनिधि होता है. मेजबान देश आमतौर पर दूतावास नामक विशिष्ट क्षेत्र में राजदूत नियंत्रण (नियन्त्रण) की अनुमति देता है.
  • राजदूत राजनीतिक और आर्थिक वार्ता करता है, सांस्कृतिक संबंध बढ़ाता है, राष्ट्रीय हितों की रक्षा करता है, और अपने नागरिकों की सहायता करता है.
  • वे अपने देश और मेजबान देश के बीच आधिकारिक संपर्क सूत्र के रूप में कार्य करते हैं, दोनों देशों के बीच प्रभावी संचार और सहयोग सुनिश्चित करते हैं.

अमरीका और रूस के राष्ट्रपति के बीच बहुप्रतीक्षित शिखर बैठक

अमरीका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और रूस के राष्‍ट्रपति ब्‍लादिमिर पुतिन के बीच बहुप्रतीक्षित बैठक 15 अगस्त को अमरीका के अलास्का के एंकोरेज में हुई थी.

बैठक के मुख्य बिन्दु

  • यह बैठक मुख्य रूप से रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को रोकने को लेकर अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा बुलाई गई थी जो बिना किसी नतीजे के संपन्न हुई.
  • फरवरी, 2022 में यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद अमरीका और रूस के बीच यह पहली शिखर बैठक थी.
  • अलास्का बैठक में न तो कोई ठोस निर्णय हुआ और न ही किसी भविष्य की बैठक की घोषणा की गई.
  • श्री ट्रंप ने संकेत दिया कि वे और पुतिन इस बात पर सहमत हैं कि आगे बढ़ने के लिए सीधे युद्ध विराम की बजाए शांति वार्ता ज्यादा उपयुक्त होगी.
  • रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प की तरह वे भी यूक्रेन युद्ध जल्द समाप्त होने के इच्छुक हैं.
  • अलास्का में बैठक के बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने यूक्रेन को रूस से समझौता करने की अपील की क्योंकि रूस एक महाशक्ति है, जबकि यूक्रेन नहीं.
  • यूक्रेन के राष्‍ट्रपति व्‍लोदिमीर जेलेंस्‍की ने कहा कि वे 18 अगस्त को वांशिगटन में अमरीका के राष्‍ट्रपति डॉनल्‍ड ट्रम्‍प से मिलेंगे.

भारत की प्रतिक्रिया

  • भारत ने अमरीका के राष्‍ट्रपति डॉनल्‍ड ट्रंप और रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन के बीच अलास्‍का में शिखर बैठक का स्‍वागत किया है.
  • विदेश मंत्रालय ने शिखर वार्ता में हुई प्रगति की सराहना करते हुए दोहराया कि समस्या का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति से ही निकाला जा सकता है.
  • भारत ने उम्मीद जताई थी कि अगर अमेरिका और रूस के बीच कोई समझौता होता, तो ट्रंप प्रशासन भारत पर लगाए गए 25% अतिरिक्त टैरिफ को हटाने या टालने पर विचार कर सकता था.

अलास्का (Alaska) कहाँ है?

  • अलास्का, संयुक्त राज्य अमेरिका का एक राज्य है, जो उत्तरी अमेरिका के उत्तर-पश्चिमी छोर पर स्थित है. अमेरिका ने 1867 में रूस से अलास्का 7.2 मिलियन डॉलर (2 सेंट प्रति एकड़) में खरीदा था.
  • यह क्षेत्रफल के हिसाब से अमेरिका का सबसे बड़ा (जनसंख्या के हिसाब से सबसे छोटा) राज्य है. यह अपनी विशाल प्राकृतिक सुंदरता, बर्फ से ढकी पर्वत-श्रृंखलाओं, गहरे जंगलों और अनगिनत ग्लेशियरों के लिए जाना जाता है.
  • यह कनाडा के साथ अपनी पूर्वी सीमा साझा करता है. इसके पश्चिम में रूस, उत्तर में आर्कटिक महासागर और दक्षिण में प्रशांत महासागर है.

अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क ने अपनी राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की

  • अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क ने अपनी राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की है. मस्क ने अपनी राजनीतिक पार्टी का नाम ‘अमेरिका पार्टी’ दिया है.
  • मस्क ने नई पार्टी की बात पहली बार तब उठाई थी जब उनका डोनाल्ड ट्रंप से विवाद हुआ था. इस झगड़े के बाद मस्क ट्रंप सरकार से अलग हो गए थे.
  • यह राजनीतिक पार्टी, अमेरिका में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों की दो-दलीय राजनीति को चुनौती देगी.

अमेरिका दो पार्टियों की प्रणाली वाला देश नहीं

  • ऐतिहासिक तौर पर देखा जाए तो अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी ने सत्ता पर कब्जा बनाए रखा है.
  • इसी के चलते अमेरिका की राजनीतिक प्रणाली को टू पार्टी सिस्टम यानी दो पार्टियों की प्रणाली से जोड़कर देखा जाने लगा है. हालांकि, अमेरिका टू पार्टी सिस्टम वाला देश नहीं है.
  • जनवरी 2025 तक अमेरिका में 55 ऐसी पार्टियां हैं, जो एक साथ कई राज्यों में बैलट पर अपना नाम दर्ज करवा चुकी हैं. वहीं, राज्य स्तर पर 238 पार्टियां हैं.
  • राष्ट्रीय स्तर पर किसी पार्टी को बैलट पर अपना नाम दर्ज करवाने के लिए कम से कम 10 राज्यों में मौजूदगी दर्ज करानी होती है.
  • इस लिहाज से जहां रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के नाम ही सभी 50 राज्यों के बैलट पर मौजूद हैं. वहीं, तीन और ऐसी पार्टियां (ग्रीन पार्टी, लिबर्टेरियन, कॉन्स्टिट्यूशन पार्टी) हैं, जो राष्ट्रीय स्तर की पार्टी मानी जाती हैं.

रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी: एक दृष्टि

रिपब्लिकन पार्टी:

  • रिपब्लिकन पार्टी को ग्रैंड ओल्ड पार्टी (GOP) भी कहा जाता है. इसकी स्थापना 1854 में हुई थी. अमेरिका में यह एक दक्षिणपंथी राजनीतिक पार्टी है.
  • रिपब्लिकन पार्टी की हालिया विचारधारा रूढ़िवाद है. यह एक ऐसी विचारधारा है जो मुक्त व्यापार, कम करों, बाजार में पूंजीवाद नहीं होने का समर्थन करती है. रिपब्लिकन पार्टी का चिह्न हाथी है.

डेमोक्रेटिक पार्टी:

  • डेमोक्रेटिक पार्टी संयुक्त राज्य अमेरिका की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी है. इसकी स्थापना 1828 में हुई थी.
  • यह आमतौर पर केंद्र-वाम विचारधारा वाली पार्टी है. यह पार्टी सामाजिक न्याय, आर्थिक समानता, और सरकार की अधिक सक्रिय भूमिका के समर्थन में जानी जाती है. डेमोक्रेटिक पार्टी का चिह्न गधा है.

मुंबई आतंकी हमले के मास्‍टर माइंड तहव्‍वुर राणा का अमरीका से प्रत्यर्पण

  • 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ता तहव्वुर हुसैन राणा को 10 अप्रैल 2025 को अमेरिका से भारत लाया गया.
  • अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तहव्वुर के भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ उसकी याचिका खारिज करने के बाद उसे भारत प्रत्यर्पित किया गया था.
  • पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक तहव्वुर को भारत में मुकदमे का सामना करने के लिए भारत लाया गया है.
  • भारत पहुंचने पर उसे राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने गिरफ्तार कर लिया. राणा को पटियाला हाउस कोर्ट में विशेष एनआईए न्यायाधीश के समक्ष पेश किया गया जहां से उसे 18 दिन की हिरासत में भेज दिया गया.
  • राणा पर डेविड कोलमैन हेडली उर्फ ​​दाउद गिलानी और नामित आतंकवादी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा तथा हरकत-उल-जिहादी इस्लामी के आतंकवादियों के साथ 2008 में मुंबई में आतंकवादी हमलों की साजिश रचने का आरोप है.
  • 2008 के मुंबई में आतंकवादी हमलों में छह अमरीकी नागरिकों सहित 166 लोग मारे गए थे. और 238 से अधिक घायल हुए थे.
  • इन हमलों में एकमात्र जीवित पकड़े गए आतंकवादी, पाकिस्तान के अजमल कसाब को बाद में भारत की अदालतों द्वारा दोषी ठहराया गया और उसे फांसी दे दी गई थी.

अमेरिका में गिरफ्तारी और भारत प्रत्यर्पण

  • 2009 में अमेरिका के संघीय जांच ब्यूरो (एफ़बीआई) ने मुंबई और डेनमार्क में हमले की साजिश रचने के आरोप में पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली और तहव्वुर राणा को गिरफ्तार किया था.
  • बाद में डेविड कोलमैन सरकारी गवाह बन गया और उसने मुंबई आतंकी साजिश और तहव्वुर राणा की भूमिका का विस्तृत विवरण दिया.
  • 2020 में, एनआईए ने अमेरिका से तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण का अनुरोध किया और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अंततः उसे भारत प्रत्यर्पित कर दिया गया.

तहव्वुर राणा कौन है?

  • 64 वर्षीय तहव्वुर राणा का जन्म पाकिस्तान में हुआ था. वह पाकिस्तानी सेना में एक चिकित्सा अधिकारी था और बाद में कनाडा चला गया और कनाडा का नागरिक बन गया.
  • बाद में, वह अमेरिका चला गया जहाँ उसने फर्स्ट वर्ल्ड इमिग्रेशन सर्विसेज कंपनी की स्थापना की. इसी कंपनी ने डेविड कोलमैन हेडली को आतंकवादी हमलों के लिए लक्ष्य चुनने के लिए मुंबई की टोह लेने के लिए कवर प्रदान किया.
  • डेविड कोलमैन हेडली का असली नाम दाऊद सईद गिलानी है. वह तहव्‍वुर राणा का बचपन का दोस्‍त है. डेविड हेडली अभी अमेरिका की एक जेल में अपनी सजा काट रहा है.

अमरीकी ने भारत सहित कई देशों पर पारस्परिक शुल्क लगाने की घोषणा की

  • अमरीकी ने भारत सहित कई देशों पर पारस्परिक शुल्क (रेसिप्रोकल टैरिफ) लगाने की घोषणा की है. यह घोषणा अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2 अप्रैल को की थी.
  • घोषणा के अनुसार अमेरिका भारत से आयातित वस्तुओं पर 26 प्रतिशत शुल्क लगाएगा.
  • श्री ट्रम्प ने कहा कि शुल्क पूरी तरह से पारस्परिक नहीं होंगे और अमरीका उन देशों द्वारा लगाए गए शुल्कों का लगभग आधा शुल्क वसूलेगा.
  • राष्ट्रपति ट्रम्प ने यूरोपीय संघ से आयात पर 20 प्रतिशत और ब्रिटेन से 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की जो अमरीका के दो मुख्य व्यापारिक साझेदार और सहयोगी देश हैं.
  • चीन पर 34 प्रतिशत, भारत पर 26 प्रतिशत, बांग्‍लादेश पर 37 प्रतिशत, पाकिस्‍तान पर 29 प्रतिशत, श्रीलंका पर 44 प्रतिशत और इजराइल पर 17 प्रतिशत आयात शुल्‍क लगाया गया है.

क्या होता है पारस्परिक शुल्क?

जब एक देश किसी दूसरे देश से आयात होने वाले उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाता है और दूसरा देश जवाब में उसी अनुपात में या कम-ज्यादा दर पर टैरिफ लगा देता है, तो इसे पारस्परिक शुल्क (रेसिप्रोकल टैरिफ) कहा जाता है.

श्री डोनाल्‍ड ट्रंप ने अमरीका के 47वें राष्‍ट्रपति के रूप में शपथ ली

  • श्री डोनाल्‍ड ट्रंप ने 20 जनवरी 2025 को अमरीका के राष्‍ट्रपति के रूप में शपथ ली. इस शपथ के साथ ही ट्रंप अमेरिका 47वें राष्ट्रपति बन गए हैं. उन्होंने अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति जो बिडेन की जगह ली है.
  • शपथ ग्रहण समारोह वाशिंगटन डीसी में था जहां मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने उन्हें शपथ दिलाई. श्री डोनाल्‍ड ट्रंप से पहले अमेरिका के 50वें उपराष्ट्रपति के रूप में जेडी वेंस ने शपथ ली.
  • अनेक विदेशी राजनेताओं ने इस शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया था.

अमेरिका राष्ट्रपति चुनाव 2024

  • संयुक्त राज्य अमेरिका में नवंबर 2024 में संपन्न हुए राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने आवश्यक इलेक्टोरल वोट प्राप्त कर विजय हुए थे.
  • डोनाल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार और वर्तमान उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को हराया था. कोई भी महिला अब तक अमेरिका की राष्ट्रपति नहीं बनी है.
  • डोनाल्ड ट्रंप इससे पहले 20 जनवरी 2017-19 जनवरी 2021 तक अमेरिका के राष्ट्रपति रहे थे. वह वर्ष 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में जो बिडेन से हार गए थे.
  • डोनाल्ड ट्रम्प के अलावा, ग्रोवर क्लीवलैंड एकमात्र अमेरिकी राष्ट्रपति हैं जो राष्ट्रपति पद पर रहते हुए फिर से निर्वाचित होने में असफल रहे लेकिन उसके बाद अगला चुनाव जीते.

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया

  • अमेरिका के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है. इनका चुनाव 538 इलेक्टोरल कॉलेज वाले निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है. जीतने वाले उम्मीदवार को इलेक्टोरल कॉलेज का 50 प्रतिशत से अधिक मत हासिल करना होता है. नवनिर्वाचित राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति 20 जनवरी को शपथ दिलाया जाता है.
  • अमेरिका के संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार को अमेरिकी नागरिक होना आवश्यक है. न्यूनतम आयु 35 वर्ष है. एक व्यक्ति को दो बार, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में चुना जा सकता है.
  • फ्रैंकलिन रूज़वेल्ट,एकमात्र अमेरिकी राष्ट्रपति हैं जिन्हे चार बार- 1933-1945 तक इस पद के लिए चुना गया था. 22वें संवैधानिक संशोधन 1951 ने अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यकाल को चार-चार साल के दो कार्यकाल तक सीमित कर दिया.
  • संयुक्त राज्य अमेरिका में राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सिर्फ दो ही राजनीतिक दल हैं, रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी.
  • डेमोक्रेटिक पार्टी का चुनाव चिन्ह गधा है और इसका रंग नीला है. रिपब्लिकन पार्टी का चुनाव चिन्ह हाथी है और पार्टी का रंग लाल है.