विश्व तपेदिक दिवस, भारत का तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम
प्रत्येक वर्ष 24 मार्च को विश्व तपेदिक दिवस (टीबी) दिवस मनाया जाता है. इसका उद्देश्य तपेदिक के विनाशकारी स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक परिणामों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और इस वैश्विक महामारी को समाप्त करने के प्रयासों को तेज करना है.
मुख्य बिन्दु
- विश्व तपेदिक दिवस 2026 का वैश्विक थीम ‘Yes! We can End TB: Led by countries, Powered by people.’ जबकि भारतीय थीम ‘Yes! We Can End TB: Led by Bharat, Powered by Jan Bhagidari’ था.
- यह दिन 1882 में डॉ. रॉबर्ट कोच द्वारा टीबी के जीवाणु की खोज की याद में मनाया जाता है.
भारत का टीबी उन्मूलन कार्यक्रम
- भारत सरकार ‘निक्षय पोषण योजना’ (Ni-kshay Poshan Yojana) के तहत टीबी मरीजों को मुफ्त इलाज और पोषण सहायता दे रही है.
- ‘निक्षय’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है: ‘नि’ (अर्थात समाप्ति या अंत) और ‘क्षय’ (अर्थात टीबी/तपेदिक). यह भारत सरकार के ‘राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम’ (NTEP) का मुख्य आधार है.
- स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) द्वारा विकसित निक्षय’ पोर्टल (Ni-kshay Portal) पर देश के हर एक टीबी मरीज का पूरा डेटाबेस रखा जाता है.
- टीबी के मरीजों को अच्छा पोषण मिल सके, इसके लिए इलाज चलने तक हर टीबी मरीज को ₹500 प्रति माह की वित्तीय सहायता दी जाती है.
- निक्षय मित्र: निक्षय मित्र (Ni-kshay Mitra) एक अनूठी पहल है जिसके तहत कोई भी आम नागरिक, कॉर्पोरेट कंपनी (CSR के तहत), एनजीओ या राजनीतिक दल किसी भी टीबी मरीज को गोद (Adopt) ले सकता है.
- ‘निक्षय मित्र’ बनने वाला व्यक्ति या संस्था मरीज को इलाज के दौरान अतिरिक्त पोषण किट (जैसे दाल, दूध, सोयाबीन, अंडे आदि), व्यावसायिक सहायता या अतिरिक्त डायग्नोस्टिक मदद प्रदान करता है.
भारत का टीबी उन्मूलन लक्ष्य
- वैश्विक लक्ष्य: संयुक्त राष्ट्र के ‘सतत विकास लक्ष्यों’ (SDG 3.3) के तहत दुनिया भर से टीबी को खत्म करने का लक्ष्य वर्ष 2030 रखा गया है.
- भारत का लक्ष्य: भारत सरकार ने दुनिया से 5 साल पहले, यानी वर्ष 2025 तक देश से टीबी को पूरी तरह से खत्म करने का बेहद महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा था.
- वर्तमान में (2026 में) स्वास्थ्य मंत्रालय इस लक्ष्य की पूर्ण प्राप्ति और बचे हुए मामलों को पूरी तरह समाप्त करने के लिए अंतिम चरण पर सघन काम कर रहा है.
