पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष और ऑपरेशन एपिक फ्यूरी

पश्चिम एशिया (Middle East) में हाल के दिनों में स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण रहा है. अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए सैन्य अभियान, इस क्षेत्र में पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा सैन्य संघर्ष बन गया है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय (संयुक्त राष्ट्र सहित) तनाव कम करने के लिए बातचीत की कोशिश कर रहा है.

अमेरिका का सैन्य अभियान: ऑपरेशन एपिक फ्यूरी

  • संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ 28 फरवरी 2026 को एक सैन्य अभियान शुरू किया था.
  • अमेरिका ने इस अभियान का नाम ऑपरेशन एपिक फ्यूरी (Operation Epic Fury) और इज़राइल ने ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ (Operation Roaring Lion) दिया गया है.
  • अमेरिका और इज़राइल के अनुसार, इसका लक्ष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट करना, उसकी मिसाइल क्षमताओं को खत्म करना और शासन परिवर्तन करना है.
  • इस अभियान में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के मुख्यालय, बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स, परमाणु बुनियादी ढांचे और नौसैनिक अड्डों (जैसे बंदर अब्बास) पर भारी बमबारी की गई.
  • अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु: तेहरान में किए गए अमेरिका और इज़राइल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के परिसर को निशाना बनाया गया, जिसमें उनकी मृत्यु हो गई.

ईरान की जवाबी कार्रवाई: ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस IV

  • ईरान ने इस हमले के जवाब में ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस IV’ शुरू किया है, जिससे युद्ध पूरे पश्चिम एशिया में फैल गया है.
  • ईरान समर्थित समूहों और ईरानी मिसाइलों ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत, बहरीन और ओमान में अमेरिकी ठिकानों और नागरिक बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया है.
  • होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): ईरान ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को बंद करने की घोषणा की है, जिससे वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति पर गहरा संकट मंडरा रहा है. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा गया है.

भारत पर प्रभाव और चिंताएं

  • भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों के लिए काफी हद तक इसी क्षेत्र पर निर्भर है. आपूर्ति रुकने से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं.
  • खाड़ी देशों से आने वाले रेमिटेंस (विदेशी मुद्रा) और व्यापारिक मार्ग बाधित होने से अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है.
  • पश्चिम एशिया में लगभग 90 लाख भारतीय रहते हैं. उनकी सुरक्षा और संभावित निकासी (Evacuation) भारत सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है.