62वां म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन म्यूनिख में संपन्न हुआ

म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (MSC) 2026, 13 से 15 फरवरी 2026 तक जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित हुआ था. यह इस सम्मेलन का 62वां संस्करण था.

सम्मेलन में चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ (जर्मनी), कीर स्टार्मर (यूके), उर्सुला वॉन डेर लेयेन (EC), वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की (यूक्रेन) जैसे प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया.

MSC 2026: मुख्य बिंदु

  • इस साल की म्यूनिख सुरक्षा रिपोर्ट का शीर्षक ‘Under Destruction’ (विनाश के अधीन) रखा गया था. यह रिपोर्ट इस बात पर केंद्रित थी कि कैसे वर्तमान वैश्विक व्यवस्था और नियम धीरे-धीरे टूट रहे हैं.
  • अमेरिका की बदलती नीतियों के बीच यूरोपीय नेताओं (जैसे चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ और कीर स्टार्मर) ने ‘यूरोप फर्स्ट’ और रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने पर जोर दिया.
  • राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने सम्मेलन में भाग लिया और रूसी मिसाइल हमलों से बचाव के लिए पश्चिमी देशों से हवाई रक्षा प्रणालियों (जैसे पैट्रियट मिसाइल) की निरंतर आपूर्ति की मांग की.
  • ईरान में अस्थिरता और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहन चर्चा हुई. सम्मेलन के दौरान म्यूनिख की सड़कों पर ईरान सरकार के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन भी देखे गए.
  • यह सम्मेलन स्पष्ट करता है कि दुनिया अब एक बहुध्रुवीय (multipolar) व्यवस्था की ओर बढ़ रही है जहाँ पारंपरिक गठबंधन (जैसे NATO) नए दबावों का सामना कर रहे हैं.

भारत की भागीदारी

  • भारत की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सम्मेलन में हिस्सा लिया. उन्होंने वैश्विक संघर्षों के बीच भारत के संतुलित और स्वतंत्र दृष्टिकोण को साझा किया.
  • उन्होंने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के अध्यक्ष वोल्फगैंग इचिंगर से मुलाकात की और विभिन्न द्विपक्षीय बैठकों में भाग लिया, जिनमें रोमानिया की विदेश मंत्री और जर्मन संसद (बुंडेस्टैग) के नेताओं के साथ मुलाकातें शामिल थीं.

म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन: एक दृष्टि

  • म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (Munich Security Conference) कोई औपचारिक निर्णय लेने वाली संस्था नहीं है, बल्कि दुनिया भर के नेताओं के लिए अनौपचारिक रूप से मिलने और वैश्विक संकटों पर बात करने का एक मंच है.
  • यह हर साल फरवरी में जर्मनी के म्यूनिख शहर (होटल बायरिशर होफ) में आयोजित किया जाता है. इसकी शुरुआत 1963 में हुई थी. इस सम्मेलन का मूल मंत्र है ‘Peace through Dialogue’ (संवाद के माध्यम से शांति).
  • इसमें दुनिया भर से राष्ट्राध्यक्ष, विदेश और रक्षा मंत्री, अंतरराष्ट्रीय संगठनों (जैसे UN, NATO, EU) के प्रमुख, खुफिया एजेंसियों के निदेशक आदि शामिल होते हैं.
  • यहाँ नेता बिना किसी सख्त प्रोटोकॉल के जटिल मुद्दों पर चर्चा करते हैं. अक्सर जिन देशों के बीच आधिकारिक संबंध तनावपूर्ण होते हैं, उनके नेता यहाँ निजी तौर पर बातचीत कर सकते हैं.