अमेरिका ने ‘इनॉग्रल क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टेरियल’ का सफल आयोजन किया
अमेरिका ने 4 फरवरी 2026 को वॉशिंगटन डीसी में ‘इनॉग्रल क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टेरियल’ (Inaugural Critical Minerals Ministerial) का सफल आयोजन किया था. यह बैठक दुनिया भर में महत्वपूर्ण खनिजों (जैसे लिथियम, कोबाल्ट, और दुर्लभ मृदा तत्व) की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित और विविध बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों के खनन और प्रसंस्करण में चीन के प्रभुत्व को कम करना है. वर्तमान में, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और रक्षा प्रणालियों के लिए आवश्यक अधिकांश खनिजों की सप्लाई चेन पर चीन का नियंत्रण है.
बैठक के मुख्य बिन्दु
- बैठक की अध्यक्षता अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने की. इस सम्मेलन में भारत सहित 54 देशों के प्रतिनिधियों और यूरोपीय आयोग ने हिस्सा लिया.
- भारत का प्रतिनिधित्व: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इस बैठक में भाग लिया और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को ‘डी-रिस्किंग’ (जोखिम कम करने) और सुरक्षित बनाने पर जोर दिया.
- अमेरिका ने अर्जेंटीना, ब्रिटेन, फिलीपींस, मोरक्को और उजबेकिस्तान सहित 11 देशों के साथ नए द्विपक्षीय फ्रेमवर्क साइन किए.
- महत्वपूर्ण खनिजों की खोज, खनन और प्रसंस्करण के क्षेत्र में भारत के साथ द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने पर सहमति बनी.
प्रमुख पहलों की घोषणा
- प्रोजेक्ट ‘फोर्ज’ (FORGE): ‘फोरम ऑन रिसोर्स जियोस्ट्रेटेजिक एंगेजमेंट’ (FORGE) को खनिज सुरक्षा साझेदारी (MSP) के उत्तराधिकारी के रूप में लॉन्च किया गया. दक्षिण कोरिया जून 2026 तक इसकी अध्यक्षता करेगा.
- प्रोजेक्ट वॉल्ट (Project Vault): अमेरिका ने अपने घरेलू निर्माताओं को आपूर्ति अवरुद्ध होने से बचाने के लिए क्रिटिकल मिनरल्स का एक रणनीतिक भंडार बनाने के लिए 10 बिलियन डॉलर के ऋण की मंजूरी दी.
- ट्रेडिंग ब्लॉक का प्रस्ताव: बैठक में एक ऐसे व्यापारिक गुट बनाने पर चर्चा हुई जहाँ मित्र देश न्यूनतम मूल्य और टैरिफ के माध्यम से एक-दूसरे के साथ खनिजों का व्यापार कर सकें.
