केंद्र, नागालैंड सरकार और ENPO के बीच ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौता

5 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में केंद्र सरकार, नागालैंड सरकार और पूर्वी नागालैंड पीपुल्स ऑर्गेनाइजेशन (ENPO) के बीच एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए. गृहमंत्री अमित शाह और नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो की उपस्थिति में इस समझौते पर हस्‍ताक्षर किये गये.

मुख्य बिन्दु

  • ENPO पूर्वी नागालैंड की 8 मान्यता प्राप्त जनजातियों (कोन्याक, फोम, चांग, खियामनियुंगन, संगतम, तिखिर, यिमखिउंग और पूर्वी सुमी) का प्रतिनिधित्व करने वाला शीर्ष संगठन है.
  • यह समझौता पूर्वी नागालैंड के छह जिलों की लंबे समय से चली आ रही ‘अलग राज्य’ की मांग का एक लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण समाधान है.
  • केंद्र ने स्पष्ट किया है कि इस समझौते से संविधान के अनुच्छेद 371(A) (जो नागालैंड को विशेष दर्जा देता है) के प्रावधानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

FNTA का गठन

  • इस समझौते के तहत नागालैंड राज्य के भीतर ही ‘फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी’ (FNTA) के गठन का मार्ग प्रशस्त हुआ है. यह एक स्वायत्त प्रशासनिक निकाय होगा.
  • यह प्राधिकरण नागालैंड के 6 पूर्वी जिलों (मोन, तुएनसांग, लोंगलेंग, किफिर, नोकलाक और शामतोर) के लिए काम करेगा.
  • FNTA को 46 विषयों पर विधायी, कार्यकारी और वित्तीय शक्तियां दी गई हैं. यानी इन विषयों से जुड़े निर्णय अब स्थानीय स्तर पर लिए जा सकेंगे.
  • FNTA के लिए एक मिनी-सचिवालय बनाया जाएगा. इसका नेतृत्व अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) या प्रधान सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे.
  • पूर्वी नागालैंड के विकास के लिए जनसंख्या और क्षेत्रफल के अनुपात में बजट आवंटित किया जाएगा. शुरुआती स्थापना खर्च केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा वहन किया जाएगा.

समझौते का महत्व

  • दशकों पुरानी मांग का अंत: ENPO वर्ष 2010 से ‘फ्रंटियर नागालैंड’ के नाम से अलग राज्य की मांग कर रहा था. इस समझौते ने राज्य के बंटवारे के बिना स्वायत्तता का रास्ता निकालकर विवाद को सुलझा दिया है.
  • विकास में समानता: पूर्वी नागालैंड के लोगों की मुख्य शिकायत यह थी कि वे विकास की मुख्यधारा से पीछे छूट गए हैं. अब सीधी फंडिंग और स्थानीय शासन से इस अंतर को पाटने में मदद मिलेगी.
  • शांतिपूर्ण पूर्वोत्तर: गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, 2019 के बाद से पूर्वोत्तर में यह 12वां प्रमुख समझौता है, जो क्षेत्र में उग्रवाद और संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है.