RBI की छठी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा: रेपो दर 5.25 प्रतिशत
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 4 से 6 फ़रवरी 2026 तक मुंबई में हुई थी. बैठक की अध्यक्षता बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की थी.
यह चालू वित्त वर्ष (2025-26) की छठी और अंतिम द्विमासिक (फ़रवरी-मार्च) मौद्रिक नीति (6th Bi-Monthly Monetary Policy) समीक्षा बैठक थी.
बैठक के प्रमुख निर्णय
नीतिगत दरें: समिति ने सर्वसम्मति से प्रमुख ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है:
- रेपो रेट (Repo Rate): 5.25%
- एसडीएफ (SDF) रेट: 5.00%
- एमएसएफ (MSF) रेट: 5.50%
- बैंक रेट (Bank Rate): 5.50%
आरबीआई ने अपना रुख ‘तटस्थ’ (Neutral) बनाए रखा है. इसका अर्थ है कि भविष्य में परिस्थितियों और डेटा के आधार पर दरों में बदलाव (कमी या वृद्धि) की संभावना खुली रखी गई है.
| मानक | वित्त वर्ष 2025-26 | 2026-27 (पहली तिमाही) | 2026-27 (दूसरी तिमाही) |
| जीडीपी वृद्धि | 7.4% (पहले 7.3% था) | 6.9% | 7.0% |
| मुद्रास्फीति | 2.1% | 4.0% | 4.2% |
प्रमुख विनियामक और ग्राहक-केंद्रित उपाय: आरबीआई ने बैंकिंग ग्राहकों और छोटे व्यवसायों के लिए कई बड़े कदमों की घोषणा की है:
- छोटे मूल्य के डिजिटल फ्रॉड (Fraud) के पीड़ितों को अब ₹25,000 तक का मुआवजा देने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है.
- सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSEs) के लिए ‘कोलेटरल-फ्री’ (बिना गारंटी के) ऋण की सीमा को ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख कर दिया गया है.
- ऐसे NBFCs जिनका एसेट साइज ₹1,000 करोड़ तक है और जिनका कोई पब्लिक फंड या ग्राहक इंटरफेस नहीं है, उन्हें पंजीकरण से छूट दी गई है.
रेपो रेट कटौती का महत्व
- रेपो रेट में कटौती से बैंकों पर ब्याज दरें घटाने का दबाव बढ़ेगा, जिससे होम लोन और अन्य कर्जों की EMI कम हो सकती है.
- यह कटौती वित्तीय प्रणाली में तरलता (Liquidity) को बढ़ाएगी और उपभोक्ताओं तथा व्यवसायों के लिए उधार लेने की लागत को कम करके आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करेगी.
वर्तमान दरें: एक दृष्टि
| नीति रिपो दर | 5.25% |
| प्रत्यावर्तनीय रेपो दर (RRR) | 3.35% |
| स्थायी जमा सुविधा (SDF) | 5.00% |
| सीमांत स्थायी सुविधा दर (MSF) | 5.50% |
| बैंक दर | 5.50% |
| नकद आरक्षित अनुपात (CRR) | 3.00% |
| वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) | 18% |
मौद्रिक नीति समिति (MPC): एक दृष्टि
- RBI की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) भारत सरकार द्वारा गठित एक समिति है. इसका गठन RBI अधिनियम 1934 के प्रावधानों के तहत 29 सितंबर 2016 को किया गया था.
- यह भारत सरकार द्वारा निर्धारित मुद्रास्फीति लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आरबीआई की नीतिगत ब्याज दर निर्धारित करती है.
- मौद्रिक नीति समिति में वर्तमान में 6 सदस्य हैं. इसमें तीन सदस्य RBI से होते हैं और तीन अन्य स्वतंत्र सदस्य भारत सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं.
- समिति की अध्यक्षता आरबीआई गवर्नर करता है. इस समिति का गठन उर्जित पटेल कमिटी की सिफारिश के आधार किया गया था.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI): एक दृष्टि
- भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) भारत का केन्द्रीय बैंक है. यह भारत के सभी बैंकों का संचालक है.
- RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को RBI ऐक्ट 1934 के अनुसार हुई. प्रारम्भ में इसका केन्द्रीय कार्यालय कोलकाता में था जो सन 1937 में मुम्बई आ गया.
- पहले यह एक निजी बैंक था किन्तु सन 1949 से यह भारत सरकार का उपक्रम बन गया है.
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत अनिवार्य रूप से मौद्रिक नीति के संचालन की जिम्मेदारी सौपीं गई है.
