वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के लिए बोर्ड ऑफ पीस का गठन
अमेरिका ने वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के लिए बोर्ड ऑफ पीस (Board of Peace) नाम से एक नया अंतर्राष्ट्रीय संगठन का गठन किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावोस (Davos) में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान इसका अनावरण किया.
बोर्ड ऑफ पीस: मुख्य बिन्दु
उद्देश्य
- इसकी शुरुआत मुख्य रूप से गाज़ा में युद्धविराम लागू करने और वहां के पुनर्निर्माण की निगरानी के लिए की गई है. यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 (2025) के अनुरूप है.
- हालाँकि इसकी शुरुआत गाज़ा के लिए हुई थी, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ा दिया गया है. इसे संयुक्त राष्ट्र (UN) के एक प्रभावी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, जो वैश्विक संघर्षों को सुलझाने का काम करेगा.
संरचना और नेतृत्व
- अमेरिकी राष्ट्रपति इसके स्थायी चेयरमैन हैं. उनके पास वीटो पावर है और वे बोर्ड के फैसलों को नियंत्रित कर सकते हैं.
- इसमें एक एग्जीक्यूटिव बोर्ड होगा जिसमें ट्रम्प के करीबी और प्रमुख कूटनीतिज्ञ शामिल हैं, जैसे:
- जेरेड कुशनर (ट्रम्प के दामाद)
- मार्को रुबियो (अमेरिकी विदेश मंत्री)
- टोनी ब्लेयर (ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री)
सदस्यता
- इस बोर्ड में शामिल होने के लिए देशों को आमंत्रित किया गया है. स्थायी सदस्यता के लिए देशों को 1 बिलियन डॉलर (लगभग 8000 करोड़ रुपये) का योगदान देना होगा. बिना फीस के देश 3 साल के लिए अस्थायी सदस्य बन सकते हैं.
- लगभग 20-30 देशों ने इसमें शामिल होने पर सहमति जताई है, जिनमें इजरायल, सऊदी अरब, मिस्र, अर्जेंटीना, तुर्की, पाकिस्तान और हंगरी जैसे देश शामिल हैं.
- ब्रिटेन, फ्रांस और कुछ अन्य यूरोपीय देशों ने इसमें शामिल होने से मना कर दिया है क्योंकि वे इसे संयुक्त राष्ट्र की व्यवस्था को कमजोर करने वाला मानते हैं.
- भारत ने भी अभी तक इसमें शामिल होने पर कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं दिखाई है.
