पृथ्वी एक गंभीर श्रेणी के भू-चुंबकीय तूफान की चपेट में आने की घटना

19 जनवरी 2026 को सौर गतिविधि के कारण पृथ्वी पर एक शक्तिशाली G4 (गंभीर) भू-चुंबकीय तूफान (Geomagnetic Storm) की घटना घटी थी हाल के दिनों में चर्चा का विषय रही थी. यह सौर चक्र 25 (Solar Cycle 25) की सबसे शक्तिशाली घटनाओं में से एक थी.

घटना के मुख्य बिंदु

  • यह तूफान सूर्य के एक सनस्पॉट (AR4341) से निकले X1.9 श्रेणी के सोलर फ्लेयर के कारण उत्पन्न हुआ. इसके साथ एक बहुत तेज़ गति वाला कोरोनल मास इजेक्शन (CME) भी था, जिसने सूर्य से पृथ्वी तक की दूरी (लगभग 15 करोड़ किमी) केवल 25 घंटों में तय कर ली, जो सामान्यतः 3-4 दिन लेता है.
  • इस घटना के कारण यूरोप (फ्रांस, जर्मनी) और उत्तरी अमेरिका के कई हिस्सों में आसमान में रंगीन रोशनी (Auroras) देखी गई. आम तौर पर ये नजारे केवल ध्रुवीय क्षेत्रों तक सीमित होते हैं, लेकिन इस तूफान की तीव्रता के कारण ये मध्य अक्षांशों (mid-latitudes) तक दिखाई दिए.
  • दुनिया भर में शॉर्टवेव रेडियो ब्लैकआउट की खबरें आईं. सैटेलाइट्स और GPS सिस्टम पर भी इसका असर देखा गया, हालाँकि किसी बड़े पावर ग्रिड के फेल होने की खबर नहीं है.
  • यह पिछले 20 वर्षों में सबसे मजबूत सौर विकिरण तूफानों में से एक था, जिसने ध्रुवीय मार्गों से उड़ान भरने वाले विमानों और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए विकिरण का खतरा बढ़ा दिया था.

भारत के संदर्भ में

  • भारत भूमध्य रेखा के करीब है, इसलिए यहाँ ऑरोरा (Auroras) दिखाई देना बहुत दुर्लभ है (सिवाय लद्दाख के हनले जैसे अति-उच्च क्षेत्रों के).
  • लेकिन, इस तरह के तूफानों का असर भारत की सैटेलाइट संचार प्रणालियों और हाई-फ्रीक्वेंसी (HF) रेडियो पर पड़ता है, जो विमानन और समुद्री संचार के लिए महत्वपूर्ण हैं.

भू-चुंबकीय तूफान (Geomagnetic Storm)

  • G4 श्रेणी का भू-चुंबकीय तूफान एक गंभीर (Severe) स्तर की घटना मानी जाती है. यह तब होता है जब सौर हवा की एक बहुत शक्तिशाली लहर पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराती है.
  • यह पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में होने वाली एक बड़ी गड़बड़ी है, जो अक्सर सूर्य से आने वाले कोरोनल मास इजेक्शन (CME) के कारण होती है.
  • NOAA (National Oceanic and Atmospheric Administration) भू-चुंबकीय तूफानों को G1 (मामूली) से G5 (चरम) के पैमाने पर मापता है.
  • इसका मुख्य प्रभाव पावर ग्रिड, अंतरिक्ष यान और सैटेलाइट, नेविगेशन और रेडियो आदि पर पड़ता है.
  • इसका आम जनता के दैनिक जीवन पर सीधा शारीरिक प्रभाव नहीं पड़ता है. पृथ्वी का वायुमंडल हमें विकिरण से बचाता है. मुख्य चिंता तकनीक और बुनियादी ढांचे (infrastructure) के लिए होती है.
  • यह तब होता है जब सूर्य अपनी सतह से प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र का एक बड़ा बादल (CME) अंतरिक्ष में छोड़ता है. जब यह बादल पृथ्वी तक पहुंचता है, तो यह हमारे चुंबकीय क्षेत्र के साथ प्रतिक्रिया करता है, जिससे ऊर्जा का एक बड़ा प्रवाह उत्पन्न होता है.