इलेक्‍ट्रोनिक घटक विनिर्माण योजना के तीसरे चरण के प्रस्तावों को मंजूरी

केन्द्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) ने 2 जनवरी 2026 को इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण योजना (ECMS) के तीसरे चरण (Tranche-3) के तहत 22 नए प्रस्तावों को मंजूरी दी है.

मुख्य बिन्दु

  • इस योजना का मुख्य उद्देश्य विदेशों से आयात होने वाले महंगे इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों का निर्माण भारत में ही करना है. यह केंद्र सरकार का भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का वैश्विक हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
  • इसमें लगभग 41863 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है. इन परियोजनाओं से 2.58 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन होने की उम्मीद है.

योजना का महत्व

  • वर्तमान में भारत कई महत्वपूर्ण घटकों के लिए चीन और अन्य देशों पर निर्भर है. इस योजना से भारत आत्मनिर्भर बनेगा.
  • आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 2026 को एक ‘ऐतिहासिक वर्ष’ बताया है क्योंकि इसी वर्ष 4 सेमीकंडक्टर इकाइयां अपना व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने वाली हैं.
  • सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को $500 बिलियन तक ले जाना है.

मंजूरी प्राप्त 22 प्रस्ताव मुख्य रूप से 11 श्रेणियों के उत्पादों का निर्माण करेंगे:

  • 5 मूल घटक (Bare Components): PCB (सर्किट बोर्ड), कैपेसिटर, कनेक्टर, एनक्लोजर (कैबिनेट) और लिथियम-आयन सेल.
  • 3 उप-संयोजन (Sub-assemblies): कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले मॉड्यूल और ऑप्टिकल ट्रांससीवर.
  • 3 आपूर्ति श्रृंखला वस्तुएं (Supply Chain items): एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न, एनोड सामग्री और लैमिनेट.

इन प्रस्तावों में देश-विदेश की कई दिग्गज कंपनियां शामिल हैं:

  • सैमसंग डिस्प्ले (Samsung Display Noida)
  • डिक्सन टेक्नोलॉजीज (Dixon Technologies)
  • फॉक्सकॉन (Yuzhan Technology India)
  • हिंडाल्को इंडस्ट्रीज (Hindalco)
  • टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics)