भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता
भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने 27 जनवरी 2026 को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप दिया है. इस समझौते को तकनीकी रूप से ‘व्यापक व्यापार और निवेश समझौता’ (Broad-based Trade and Investment Agreement – BTIA) कहा जाता है. दोनों संसदों (भारतीय और यूरोपीय संसद) से मंजूरी के बाद यह समझौता लागू होगा.
समझौते की घोषणा
इस समझौते की घोषणा भारत की यात्रा आए यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर की.
एंटोनियो कोस्टा (Antonio Costa) और उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) भारत के 77वें गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2026) समारोह के मुख्य अतिथि (Chief Guests) के रूप में भारत आए थे.
मदर ऑफ ऑल डील्स
यह समझौता भारत और EU दोनों के लिए अब तक का सबसे बड़ा और व्यापक व्यापार सौदा है. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ (Mother of All Deals) कहा है. यह वैश्विक जीडीपी का 25% और वैश्विक व्यापार का एक-तिहाई कवर करता है.
समझौते की मुख्य बातें
- यूरोपीय संघ को भारत के 99.5% निर्यात से शुल्क हटाएगा. भारत भी EU के 96.6% सामानों पर टैरिफ कम या खत्म करेगा.
- यूरोपीय कारों पर आयात शुल्क चरणबद्ध तरीके से 110% से घटाकर 10-40% के बीच लाया जाएगा. एक साल में केवल 50,000 लग्जरी कारें ही कम टैक्स पर आ सकेंगी ताकि भारतीय कार कंपनियों को नुकसान न हो.
- 750ml से ऊपर की महंगी शराब बोतलों पर शुल्क 150% से घटाकर 50% और धीरे-धीरे 20% तक लाया जाएगा. सस्ती शराब पर शुल्क अभी भी रहेगा.
- पास्ता, चॉकलेट और जैतून के तेल (Olive Oil) जैसे उत्पादों पर शुल्क 0% किया जाएगा. भारतीय कपड़ा, चमड़ा, फर्नीचर, खेल के सामान और आभूषण पर शुल्क 0% किया जाएगा.
- भारत ने 102 और EU ने 144 सेवा क्षेत्रों (IT, शिक्षा, वित्त, पर्यटन) में पहुंच प्रदान की है.
- भारतीय किसानों के हितों की रक्षा के लिए डेयरी उत्पाद, सोया मील और अनाज जैसे क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा गया है.
- यूरोपीय संघ ने अपने बीफ, पोल्ट्री और चीनी क्षेत्रों को उदार बनाने से मना किया है.
- यूरोपीय कंपनियों को भारत के बैंकिंग, बीमा और लीगल सर्विसेज (कानूनी सलाह) में कुछ शर्तों के साथ काम करने की अनुमति मिली है.
- अगर किसी यूरोपीय कंपनी और भारत सरकार के बीच विवाद होता है, तो उसे निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल में सुलझाया जाएगा.
भारत को मुख्य लाभ
- कपड़ा (Textile), चमड़ा, रत्न और आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को यूरोपीय बाजार में जीरो ड्यूटी एंट्री मिलेगी. इससे लाखों नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है.
- भारतीय पेशेवरों (IT इंजीनियर्स, डॉक्टर्स) के लिए यूरोप में काम करना और वीजा प्राप्त करना आसान होगा. छात्रों के लिए ‘पोस्ट-स्टडी वर्क’ के बेहतर अवसर मिलेंगे.
- भारत खुद को वैश्विक सप्लाई चेन में चीन के एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित कर सकेगा.
यूरोपीय संघ को मुख्य लाभ
- यूरोप को भारत के रूप में एक विशाल और बढ़ता हुआ बाजार मिला है. भारत का मध्यम वर्ग यूरोपीय सामानों (जैसे लक्जरी कारें, ब्रांडेड कपड़े, शराब और खाद्य पदार्थ) का बड़ा उपभोक्ता बन रहा है.
- इस समझौते से यूरोपीय कंपनियों को सीमा शुल्क के रूप में सालाना लगभग 4 अरब यूरो (₹36,000 करोड़) की बचत होगी, जिससे उनके उत्पाद भारत में सस्ते और प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे.
- भारत के साथ यह समझौता यूरोप को चीन का एक विश्वसनीय और लोकतांत्रिक विकल्प प्रदान करता है.
