26 जनवरी 2026 को 77वां गणतंत्र दिवस मनाया गया

भारत ने 26 जनवरी 2026 को अपना 77वां गणतंत्र दिवस (77th Republic Day) मनाया. इस अवसर पर मुख्य समारोह राष्ट्रीय राजधानी में कर्तव्‍य पथ (राजपथ) पर आयोजित किया गया था. यहां हर साल की तरह देश की संस्कृति को दिखाने वाली झाकियों के साथ भारतीय सेना ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया.

77वां गणतंत्र दिवस: मुख्य बिन्दु

  • कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उपयोग किए गए घातक हथियारों और स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों (ब्रह्मोस, आकाश) का प्रदर्शन हुआ.
  • पहली बार भारतीय सेना ने ‘बैटल एरे’ (Battle Array) फॉर्मेशन का प्रदर्शन किया, जिसमें ड्रोन और आधुनिक टैंकों का सामंजस्य दिखाया गया.
  • 21 तोपों की सलामी के लिए स्वदेशी रूप से विकसित 105mm लाइट फील्ड गन का उपयोग किया गया.
  • कुल 30 झांकियां निकाली गईं (17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से और 13 मंत्रालयों से), जिनमें छत्तीसगढ़ की ‘वंदे मातरम’ थीम वाली झांकी काफी चर्चा में रही.

मुख्य अतिथि

  • इस वर्ष भारत ने एक ऐतिहासिक मिसाल कायम करते हुए यूरोपीय संघ (EU) के दो शीर्ष नेताओं को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया:
  • एंटोनियो कोस्टा: यूरोपीय परिषद (European Council) के अध्यक्ष.
  • उर्सुला वॉन डेर लेयेन: यूरोपीय आयोग (European Commission) की अध्यक्ष.
  • यह पहली बार था जब यूरोपीय संघ के दो प्रमुख नेतृत्व एक साथ गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हुए, जो भारत-EU के मजबूत होते संबंधों का प्रतीक है.

77वें गणतंत्र दिवस की थीम

  • 77वें गणतंत्र दिवस समारोह का मुख्य विषय (Theme) ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ (150 Years of Vande Mataram) था.
  • यह महान रचनाकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित राष्ट्रीय गीत की 150वीं वर्षगांठ को समर्पित था.

गणतन्त्र दिवस क्या है?

  • गणतन्त्र दिवस भारत का एक राष्ट्रीय पर्व है जो प्रति वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है. यह दिवस 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान के आधिकारिक रूप से लागू होने की याद में मनाया जाता है. इसी दिन सन् 1950 को भारत सरकार अधिनियम (एक्ट) (1935) को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था.
  • किसी देश को गणतंत्र तब माना जाता है जब उस देश के प्रमुख का निर्वाचन जनता द्वारा किया जाए. एक स्वतंत्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए संविधान को 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान-सभा द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को इसे एक लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया था.

गणतन्त्र दिवस समारोह का इतिहास

  • पहला गणतंत्र दिवस समारोह 1950 में दिल्‍ली के इ‍रविन एम्‍पीथियेटर में मनाया गया था. जिसे वर्तमान में मेजर ध्‍यानचंद नेशनल स्‍टेडियम के रूप में जाना जाता है. बाद के वर्षों में यह समारोह परेड़ किंग्‍जवे, लाल किला और रामलीला मैदान में आयोजित की गई.
  • 1955 में कर्तव्‍य पथ (राजपथ) परेड़ के लिए स्‍थायी स्‍थल बन गया. उस समय राजपथ को किंग्‍जवे नाम से जाना जाता था. 1955 में जब राजपथ पर परेड़ हुई तब पाकिस्‍तान के गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्‍मद को मुख्‍य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था.

बीटिंग रीट्रिट के साथ गणतंत्र दिवस समारोह का समापन

  • हर साल 29 जनवरी को विजय चौक पर होने वाले समारोह ‘बीटिंग रीट्रिट’ के साथ गणतंत्र दिवस समारोह का समापन होता है. यह 1950 के दशक की शुरूआत में उस समय शुरू हुआ जब भारतीय सेना के मेजर रॉबर्ट्स ने बैंड द्वारा प्रदर्शन का अनूठा तरीका विकसित किया था.