राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की अंगोला और बोत्सवाना यात्रा
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 8 से 13 नवंबर, 2025 तक अंगोला और बोत्सवाना की ऐतिहासिक राजकीय यात्रा पर थे. यह किसी भी भारतीय राष्ट्रपति की इन दोनों दक्षिणी अफ्रीकी देशों की पहली यात्रा थी.
इस यात्रा का उद्देश्य अफ्रीकी महाद्वीप के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करना और ग्लोबल साउथ देशों के साथ साझेदारी को गहरा करना था.
अंगोला यात्रा के मुख्य बिंदु
- राष्ट्रपति मुर्मू की बोत्सवाना यात्रा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की 40वीं वर्षगांठ के अवसर पर हुई.
- राष्ट्रपति मुर्मू ने अंगोला के राष्ट्रपति जोआओ लौरेन्सो से मुलाकात की और द्विपक्षीय वार्ता की.
- रणनीतिक खनिजों और दुर्लभ खनिजों (Critical and Rare Minerals) की खोज में भारतीय कंपनियों के सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई.
- राष्ट्रपति मुर्मू ने डिजिटल तकनीक, अंतरिक्ष सहयोग और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया.
- उन्होंने कहा कि भारत में निर्मित वंदे भारत हाई-स्पीड ट्रेनें जैसी तकनीक और ज्ञान अंगोला के साथ साझा किया जा सकता है.
- राष्ट्रपति मुर्मू ने 11 नवंबर को अंगोला की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ के समारोह में हिस्सा लिया और अंगोला की संसद को संबोधित किया.
- भारत अंगोला की रक्षा आधुनिकीकरण योजना के लिए 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट (LoC) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है.
- अंगोला, जो तेल का प्रमुख उत्पादक है, भारत की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
बोत्सवाना यात्रा के मुख्य बिंदु
- राष्ट्रपति मुर्मू की बोत्सवाना यात्रा दोनों देशों के राजनयिक संबंधों की स्थापना की 60वीं वर्षगांठ पर हुई है.
- बोत्सवाना में राष्ट्रपति मुर्मू ने राष्ट्रपति ड्यूमा गिडियन बोको के साथ द्विपक्षीय वार्ता की.
- दोनों नेताओं ने प्रोजेक्ट चीता के तहत भारत को बोत्सवाना से 8 चीते भेजने की घोषणा का स्वागत किया. यह वन्यजीव संरक्षण में दोनों देशों के बीच सहयोग का एक प्रमुख कदम है.
- दोनों देशों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जो बोत्सवाना के नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और सस्ती भारतीय दवाएं आसानी से उपलब्ध कराने में मदद करेगा.
- शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, व्यापार, निवेश, नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी.
- राष्ट्रपति मुर्मू ने बोत्सवाना की संसद को संबोधित किया और भारत को बोत्सवाना के विकास के सफर में एक भरोसेमंद और विश्वसनीय साझेदार बताया.
