भारत के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से त्यागपत्र दिया
भारत के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को अपने पद से त्यागपत्र दे दिया. उन्होंने अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को सौंपा. उन्होंने त्यागपत्र का कारण, स्वास्थ्य प्राथमिकता और चिकित्सा परामर्श के पालन को बताया है.
त्यागपत्र देने वाले तीसरे उपराष्ट्रपति
- वीवी गिरि और भैरों सिंह शेखावत के बाद जगदीप धनखड़ अपने कार्यकाल के दौरान त्यागपत्र देने वाले तीसरे उपराष्ट्रपति हैं.
- 10वें उपराष्ट्रपति कृष्णकांत एकमात्र ऐसे उपराष्ट्रपति हैं जिनका कार्यकाल के दौरान निधन (27 अगस्त 2002) हो गया था.
- आर वेंकटरमन, शंकर दयाल शर्मा और केआर नारायणन ने भारत के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद उपराष्ट्रपति पद से त्यागपत्र दे दिया था.
राज्य सभा के सभापति
- अनुच्छेद-64 के तहत उप-राष्ट्रपति भारतीय संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं. इसलिए राज्य सभा के उप-सभापति, नए उप-राष्ट्रपति के निर्वाचित होने तक राज्यसभा के पीठासीन अधिकारी होंगे.
जगदीप धनखड़: एक दृष्टि
- जगदीप धनखड़ मूल रूप से राजस्थान के झुंझुनू जिले में हुआ था. वे पेशे से एक वकील हैं, बाद में राजनीति में आ गए. वह भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे है.
- वह 1989 में झुंझुनू संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सदस्य चुने गए थे. 1993 में किशनगढ़ विधानसभा सीट से राजस्थान विधानसभा सदस्य चुने गए.
- उन्होंने 1990 में केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया. वे 2019-2022 तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे.
- जगदीप धनखड़ ने 11 अगस्त 2022 को भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी.
भारतीय संविधान में उप-राष्ट्रपति
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 63 में भारत के उप-राष्ट्रपति होने की बात कही गई है. उप-राष्ट्रपति देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है. उनका कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है.
- अनुच्छेद 65 के अनुसार, राष्ट्रपति की मृत्यु, इस्तीफे या हटाने की स्थिति में उपराष्ट्रपति उस तारीख तक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा जब तक कि नए राष्ट्रपति की नियुक्ति नहीं की जाती.
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 67 (क) के अनुसार, उपराष्ट्रपति भारत के राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र दे सकता है.
उपराष्ट्रपति चुनाव
- संविधान का अनुच्छेद 324 तहत, उपराष्ट्रपति चुनाव भारतीय निर्वाचन आयोग संपन्न कराता है. इसके लिए निर्वाचन आयोग एक निर्वाचन अधिकारी नियुक्त करता है.
- राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों पदों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से (आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति) होता है. यानी चुनाव जनता की बजाय उनके द्वारा चुने गए जन प्रतिनिधि करते हैं.
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 66 में उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया का उल्लेख है. उपराष्ट्रपति चुनाव में लोक सभा और राज्य सभा के सदस्य, जिनमें मनोनीत सदस्य भी शामिल हैं, मतदान में हिस्सा लेते हैं.
- वहीं राष्ट्रपति के चुनाव में लोक सभा और राज्य सभा के निर्वाचित सदस्य और राज्यों के विधानमंडलों के सदस्यों को भी मतदान का अधिकार होता है. राष्ट्रपति चुनाव में किसी भी सदन के मनोनीत सदस्य को वोट नहीं डाल सकते.
- राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति चुनाव में किसी भी संदेह या विवाद सामने आने पर संविधान के अनुच्छेद-71 के मुताबिक, फैसले का अधिकार केवल देश की सुप्रीम कोर्ट को है.
- उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन भरने के लिए उम्मीदवार को कम-से-कम 20 सांसद बतौर प्रस्तावक और 20 सांसद बतौर समर्थक दिखाने की शर्त पूरी करनी होती है. उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं होना चाहिए.
नए उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए समय-सीमा
- संविधान में भारत के कार्यवाहक उपराष्ट्रपति पद का कोई उल्लेख नहीं है. अतः नए उपराष्ट्रपति के निर्वाचित होने तक यह पद रिक्त रहेगा.
- संविधान के अनुच्छेद 68 (ख) के अनुसार मृत्यु, त्यागपत्र, पदच्युति या अन्य किसी कारण से पद रिक्त होने की स्थिति में, नए उपराष्ट्रपति के लिए चुनाव यथाशीघ्र कराया जाएगा.
- अतः संविधान में नए उप-राष्ट्रपति के चुनाव के लिए कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं है, यदि यह पद किसी कारण से रिक्त हो जाता है.
