इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष, ईरान का ऑपरेशन सीवियर पनिशमेंट
इस्राइली वायुसेना ने 12 जून को ईरान पर हवाई हमले किए. इजरायल ने इसका नाम ‘ऑपरेशन राइजिंग लॉयन’ दिया है.
ऑपरेशन राइजिंग लॉयन
- इजरायल द्वारा शुरू किया गया ‘ऑपरेशन राइजिंग लॉयन’ का उद्देश्य ईरान के परमाणु क्षमता को खत्म करना है.
- इस्राइली हमले में ईरान के परमाणु, सैन्य ठिकाने और रिवेल्यूशनरी गार्डस मुख्यालय को निशाना बनाया गया.
- इस हमले में ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्डस प्रमुख हुसैन सलामी और परमाणु ऊर्जा संगठन के पूर्व प्रमुख फरीदुल अब्बासी सहित कई शीर्ष सैन्य कमांडरों की भी मौत हो गई.
- इस्राइल के हमले में ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया गया जिससे ईरान के परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को गंभीर क्षति पहुंची.
ईरान का ऑपरेशन सीवियर पनिशमेंट
- ईरान ने इस्राइल के हमलों की जवाबी कार्रवाई में 14 जून को सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे जिसे ऑपरेशन सीवियर पनिशमेंट नाम दिया गया है.
- ईरान ने तेल अवीव और यरुशलम के रिहायशी इलाकों में बड़े पैमाने पर मिसाइलों से हमले किए. ऐसा पहली बार हुआ जब किसी देश की मिसाइलों ने इस्राइल की हवाई सुरक्षा को नाकाम कर दिया. इस्राइल
- इस्राइल के रक्षा मंत्री इस्राइल कैट्ज ने जानबूझकर इस्राइल के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाए जाने की बात कही है. उन्होंने कहा कि इस्राइल इसका करारा जवाब देगा.
क्षेत्रीय संघर्ष की आशंकाएं
- दोनों देशों के बीच भीषण हमलों से व्यापक स्तर पर क्षेत्रीय संघर्ष की आशंकाएं बढ़ गई हैं.
- इजराइल का सबसे बड़ा समर्थक देश, अमेरिका ने इजराइली हमले में शामिल नहीं होने की बात कही है. अमेरिका लंबे समय से इस तरह के हमले को रोकने के प्रयास कर रहा है, क्योंकि उसे डर है कि इससे पश्चिम एशिया में बड़े पैमाने पर युद्ध छिड़ जाएगा.
- अमरीका और ईरान के मध्य 15 जून को मस्कट में होने वाली परमाणु वार्ता रद्द कर दी गई है. वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे ओमान ने यह वार्ता रद्द करने की घोषणा की.
भारत की प्रतिक्रिया
- भारत ने ईरान और इस्राइल के बीच हाल के घटनाक्रमों पर चिंता व्यक्त करते हुए दोनों पक्षों से कहा कि वे तनाव को कम करने करने के लिए बातचीत और कूटनीति के रास्ते अपनाएं.
- विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत के दोनों देशों के साथ घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंध हैं और उन्हें हर संभव सहायता देने के लिए तैयार है.
ईरान ने IAEA समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया
- इजरायल का यह हमला अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा 12 जून 2025 को लिए गए निर्णय के बाद हुआ है. IAEA ने ईरानी परमाणु कार्यक्रम को 1974 के समझौते की शर्तों का उल्लंघन बताया है.
- IAEA के अनुसार ईरान शांतिपूर्ण नागरिक परमाणु कार्यक्रम की आवश्यकता से अधिक यूरेनियम का संवर्धन कर रहा है.
ईरान परमाणु अप्रसार संधि का सदस्य
- ईरान परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का सदस्य है, जिस पर 1968 में हस्ताक्षर किये गये थे. NPT के तहत, केवल पाँच देश- चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका, परमाणु हथियार रख सकते हैं.
- एनपीटी के अन्य हस्ताक्षरकर्ता देश शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन सैन्य उद्देश्यों के लिए इसका उपयोग नहीं कर सकते.
- भारत, पाकिस्तान और इज़राइल एनपीटी के सदस्य नहीं हैं लेकिन इनके पास भी परमाणु हथियार हैं.
- भारत और पाकिस्तान ने परमाणु हथियारों का परीक्षण किया है. इज़राइल ने अपने पास परमाणु हथियार हैं होने की बात कभी सार्वजनिक रूप से इसे स्वीकार नहीं की है.
ईरान का परमाणु कार्यक्रम
- ईरान के पास एक सक्रिय परमाणु कार्यक्रम है और कई देशों को संदेह है कि वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है. वह अपने यूरेनियम संवर्धन स्तर को लगातार बढ़ा रहा है.
ईरान से दुनिया क्यों चिंतित है
- ईरान एक शिया बहुल मुस्लिम देश है, जबकि सऊदी अरब, यूएई आदि जैसे अन्य अरब देश सुन्नी मुस्लिम देश हैं.
- ईरान और सऊदी अरब के बीच गहरी दुश्मनी है और दोनों ही खुद को इस्लामी दुनिया के नेता के रूप में पेश करते हैं.
- अगर ईरान को परमाणु हथियार मिल जाता है, तो सऊदी अरब पर परमाणु हथियार बनाने का दबाव होगा.
- यह पश्चिम एशिया क्षेत्र में परमाणु हथियारों की दौड़ को बढ़ावा देगा, जो तेल और गैस भंडार से समृद्ध है और दुनिया के लिए एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है.
- ईरानी सरकार ने खुले तौर पर कहा है कि वह इजरायल को नष्ट कर देगा और अमेरिका को अपना दुश्मन नंबर एक मानती है.
- इजरायल का कहना है कि वह ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दे सकता, क्योंकि इससे उसका अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा.
