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24 फरवरी: केन्द्रीय उत्पाद शुल्क दिवस

प्रत्येक वर्ष 24 फरवरी को केन्द्रीय उत्पाद शुल्क दिवस (Central Excise Day) मनाया जाता है. यह दिवस केन्द्रीय वित्त मंत्रालय के अंतर्गत केन्द्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क विभाग द्वारा मनाया जाता है. यह दिवस 24 फ़रवरी, 1944 को केन्द्रीय उत्पाद शुल्क तथा नमक क़ानून लागू किए जाने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है.

इस दिवस को मनाने का उद्देश्य आम लोगों में उत्पाद शुल्क और सेवा शुल्क की अहमियत बताना है. देश का औद्योगिक विकास तभी संभव है जब देशवासी उत्पाद शुल्क उत्पाद कर भरते हैं, इसके प्रति लोगों को जागरूक करने की जरूरत को समझते हुए यह दिन मनाया जाता है.

केन्द्रीय उत्पाद शुल्क विभाग

केन्द्रीय उत्पाद शुल्क विभाग 1855 में अंग्रेज़ों द्वारा स्थापित भारत के सबसे पुराने विभाग में से एक है. वर्ष 1996 से पहले ‘केंन्द्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम’ को ‘केन्द्रीय उत्पाद शुल्क और नमक अधिनियम’ के रूप में जाना जाता था. मार्च 2017 में इसका नाम परिवर्तित करके सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज एंड कस्टम्स (CBEC) रख दिया गया था.

21 फरवरी: अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

प्रत्येक वर्ष 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (International Mother Language Day) के रूप में मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य भाषायी और सांस्कृतिक विविधता को प्रोत्साहित करना है.

इस वर्ष यानी 2020 के अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का मुख्य विषय (थीम) ‘शिक्षा और समाज में समावेशन के लिए बहुभाषिता को बढ़ावा देना’ है.

संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस को मनाये जाने की स्वीकृति 17 नवम्बर 1999 को दी थी.

21 फरवरी, 1952 को ढाका में कई छात्रों ने ‘बांग्ला’ को राष्ट्रभाषा बनाने की मांग को लेकर आंदोलन में पुलिस की गोलियों से शहादत हासिल की थी. संयुक्त राष्ट्र ने इसकी स्मृति में प्रतिवर्ष इस दिन दिवस मनाने का निर्णय किया. बांग्लादेश में इस दिन राष्ट्रीय अवकाश होता है.

20 फरवरी: अरूणाचल प्रदेश और मिजोरम का स्‍थापना दिवस

प्रत्येक वर्ष 20 फरवरी को अरूणाचल प्रदेश और मिजोरम का स्‍थापना दिवस (Arunachal Pradesh and Mizoram Statehood Day) मनाया जाता है. अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम को 1987 में आज ही के दिन राज्य का दर्जा मिला था. इस वर्ष यानी 2021 में 35वां स्थापना दिवस है.

अरुणाचल प्रदेश

  • अरुणाचल प्रदेश 20 फ़रवरी, 1987 को भारतीय संघ का 24वां राज्य बना था. 1972 तक, इसे नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी (NEFA) के नाम से जाना जाता था.
  • सन 1972 में इसे प्रदेश को केंद्र शासित राज्य बनाया गया था और इसका नाम ‘अरुणाचल प्रदेश’ किया गया था. केंद्रशासित प्रदेश अरुणाचल प्रदेश को राज्य का दर्जा दिए जाने के लिए 55वां संविधान संशोधन किया गया था.
  • अरुणाचल प्रदेश भारत गणराज्य का एक उत्तर पूर्वी राज्य है. ‘अरुणाचल’ का अर्थ हिन्दी में शाब्दिक अर्थ है ‘उगते सूर्य की भूमि’ (अरुण+अचल). ईटानगर राज्य की राजधानी है. अरुणाचल प्रदेश की मुख्य भाषा हिन्दी और असमिया है.
  • प्रदेश की सीमाएँ दक्षिण में असम दक्षिण-पूर्व मे नागालैंड पूर्व में म्यांमार, पश्चिम में भूटान और उत्तर में तिब्बत से मिलती हैं. भौगोलिक दृष्टि से पूर्वोत्तर के राज्यों में यह सबसे बड़ा राज्य है.

मिज़ोरम

  • मिज़ोरम 1987 को भारत का 23वां राज्य बना था. 1972 में पूर्वोत्तर क्षेत्र पुनर्गठन अधिनियम लागू होने पर मिजोरम केंद्रशासित प्रदेश बना था. केंद्रशासित प्रदेश बनने से पहले तक यह असम का एक जिला था.
  • भारत सरकार और मिज़ो नेशनल फ्रंट के बीच 1986 में हुए ऐतिहासिक समझौते के फलस्वरूप 20 फरवरी, 1987 को इसे पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया. इसके लिए 53वां संविधान संशोधन किया गया था.
  • मिज़ोरम भारत का एक उत्तर-पूर्वी राज्य है. मिजोरम में साक्षरता का दर भारत में सबसे अधिक 91.03% है. यहाँ की राजधानी आईजोल है.
  • पूर्व और दक्षिण में म्यांमार और पश्चिम में बांग्लादेश के बीच स्थित होने के कारण भारत के पूर्वोत्तर कोने में मिजोरम सामरिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण राज्य है.

20 फरवरी: विश्व सामाजिक न्याय दिवस

प्रत्येक वर्ष 20 फरवरी को विश्व भर में ‘सामाजिक न्याय दिवस’ (World Day of Social Justice) मनाया जाता है. इस अवसर पर विभिन्न संगठनों, जैसे- संयुक्त राष्ट्र एवं अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा लोगों से सामाजिक न्याय हेतु अपील जारी की जाती है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 2007 में इस दिवस को मनाने की शुरुआत की गयी थी. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, सामाजिक न्याय का अर्थ है लिंग, आयु, धर्म, अक्षमता तथा संस्कृति की भावना को भूलकर समान समाज की स्थापना करना.

वर्ष 2021 में इस दिवस का मुख्य विषय (थीम) ‘A Call for Social Justice in the Digital Economy’ है.

19 फरवरी: देशभर में ‘मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड दिवस’ मनाया गया

19 फरवरी को देशभर में ‘मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड दिवस’ मनाया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 फरवरी 2015 को राजस्थान के हनुमानगढ से मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) योजना का शुभारंभ किया था. साइल कार्ड योजना में मिट्टी में कम हो रहे पोषक तत्वों की समस्या पर फोकस किया जाता है.

मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड: एक दृष्टि

  • इस योजना का उद्देश्य प्रत्‍येक दो वर्ष में किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी करना है ताकि मिट्टी में पोषक तत्‍वों की कमी दूर करने के उपाय किये जा सकें.
  • इस योजना का शुभारंभ करते हुए श्री मोदी ने कहा था कि किसानों को मिट्टी की सेहत की जानकारी होनी चाहिए. उन्होंने कहा था कि यदि मिट्टी सेहतमंद नहीं होगी, तो कृषि उपज नहीं बढ़ेगी.
  • राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद् द्वारा किये गये एक अध्ययन के अनुसार देश में मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड (Soil Health Card) के उपयोग से उर्वरक के उपयोग में 10% की कमी आई है. इस अध्ययन से यह भी ज्ञात हुआ है कि मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड के कारण उत्पादकता में 5-6% की वृद्धि हुई है.

19 फरवरी 2021: छत्रपति शिवाजी महाराज की 391वीं जयंती मनाई गयी

19 फरवरी 2021 को छत्रपति शिवाजी महाराज की 391वीं जयंती मनाई गयी. 19 फरवरी 1630 में शिवनेरी दुर्ग में उन्का जन्म हुआ था. छत्रपति शिवाजी को एक कुशल रणनीतिकार और निपुण प्रशासक के रूप में याद किया जाता है.

छत्रपति शिवाजी: एक दृष्टि

  • छत्रपति शिवाजी महाराज ने पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी थी.
  • उन्होंने दक्कन में हिंदू राज्य की स्थापना की थी, जो कई वर्ष औरंगज़ेब के मुगल साम्राज्य से संघर्ष किया.
  • 1674 ई.में रायगढ़ में उनका राज्याभिषेक हुआ और वे छत्रपति बन गये.
  • शिवाजी ने समर-विद्या में अनेक नवाचार किये और गुरिल्ला वॉर की नयी शैली विकसित की.
  • उन्होंने प्राचीन हिन्दू राजनीतिक प्रथाओं को पुनर्जीवित किया और फारसी के स्थान पर मराठी और संस्कृत को राजकाज की भाषा बनाया.
  • 3 अप्रैल 1680 को महज 50 साल की उम्र में वीर छत्रपति शिवाजी महाराज ने लंबी बीमारी के बाद अंतिम सांस ली.

13 फरवरी: राष्ट्रीय महिला दिवस, सरोजिनी नायडू का जन्मदिन

प्रत्येक वर्ष 13 फरवरी को ‘राष्ट्रीय महिला दिवस’ (National Women’s Day) के रूप में मनाया जाता है. यह दिवस भारत के स्वतंत्रता सेनानी और कवि सरोजिनी नायडू के जन्मदिन पर मनाया जाता है. सरोजिनी नायडू का जन्म इसी दिन 1879 में हुआ था. इस वर्ष यानी 2021 में उनकी 142वीं जयंती मनाई गयी.

सरोजिनी नायडू: एक दृष्टि

  • सरोजिनी नायडू ने देश की आजादी के लिए भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया था. वह कांग्रेस पार्टी की पहली महिला अध्यक्ष थी.
  • उनकी कविताओं के कारण उन्हें ‘नाइटिंगेल ऑफ इंडिया (भारत कोकिला’)’ के उपनाम से भी जाना जाता है.
  • सरोजिनी नायडू संयुक्त प्रांत (वर्तमान उत्तर प्रदेश) की पहली महिला राज्यपाल भी बनीं थीं.
  • उन्हें 1928 के दौरान भारत में प्लेग महामारी के दौरान उनके काम के लिए ‘कैसर-ए-हिंद’ पदक से सम्मानित किया गया था.
  • उन्होंने महिला सशक्तीकरण की भी वकालत करते हुए 1917 में महिला भारतीय संघ (WIA) की स्थापना में मदद की.
  • उन्होंने सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन का प्रमुखता से नेतृत्व किया था.

सरोजिनी नायडू के मुख्य कोट्स

  1. हम अपनी बीमारी से भारत को साफ करने से पहले पुरुषों की एक नई नस्ल चाहते हैं.
  2. एक देश की महानता, बलिदान और प्रेम उस देश के आदर्शों पर निहित करता है.
  3. हम गहरी सच्चाई का मकसद चाहते हैं, भाषण में अधिक से अधिक साहस और कार्यवाही में ईमानदारी.
  4. श्रम करते हैं हम कि समुद्र हो तुम्हारी जागृति का क्षण, हो चुका जागरण अब देखो, निकला दिन कितना उज्ज्वल.

13 फरवरी: विश्व रेडियो दिवस

प्रत्येक वर्ष 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस (World Radio Day) मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्‍य जनता और मीडिया में रेडियो के महत्‍व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है.

यह दिन रेडियो की अनोखी क्षमता को याद करने के लिए भी मनाया जाता है, यह आम लोगों के जीवन से सीधा जुड़ा है और दुनिया के सभी भागों के लोगों को जोड़ता है.

विश्व रेडियो दिवस 2021 का मुख्य विषय (थीम) ‘New World, New Radio’ है.

यूनेस्को ने साल 2011 में विश्व-स्तर पर रेडियो दिवस मनाने का फैसला लिया था. 13 फरवरी का दिन विश्व रेडियो दिवस के रूप में इसलिए चुना गया क्योंकि 13 फ़रवरी 1946 से ही रेडियो संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) द्वारा अपने रेडियो प्रसारण की शुरुआत की गई थी.

10 फरवरी: विश्व दाल दिवस

प्रत्येक वर्ष 10 फरवरी को विश्व दाल दिवस (World Pulses Day) के रूप में मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य दाल में विद्यमान पोषक तत्वों और उसकी उपयोगिता के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना है. पहला विश्व दाल दिवस 10 फरवरी 2019 को मनाया गया था.

दाल पोषण तथा खाद्य सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं. इसको ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2016 को अन्तर्राष्ट्रीय दालों का वर्ष घोषित किया गया था.

इस वर्ष यानी 2021 में विश्व दाल दिवस का मुख्य विषय (theme) ‘Nutritious Seeds for a Sustainable Future’ है.

दलों का महत्व

दालें खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण हैं. यह विश्व की एक बड़ी जनसँख्या का प्रमुख भोजन हैं. दालों से जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है. दालों के कारण संश्लेषित उर्वरकों के उपयोग में कमी आती है. इससे ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में भी कमी होती है.

गोरखपुर के चौरी-चौरा में चौरी-चौरा घटना शताब्‍दी समारोह

गोरखपुर के चौरी-चौरा में 4 फरवरी को चौरी-चौरा की घटना की स्मृति में शताब्‍दी समारोह की शुरुआत हुई. प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने इस समारोह का विडियो कांफ्रेंसिंग माध्यम से उद्घाटन किया. प्रधानमंत्री ने चौरी-चौरा शताब्‍दी वर्ष के अवसर पर एक डाक टिकट भी जारी किया.

उत्‍तर प्रदेश में यह समारोह एक वर्ष तक चलेगा. इसमें महान स्‍वाधीनता सेनानियों के स्‍मारकों पर अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. इसके अलावा, राज्‍यभर में निबंध लेखन प्रतियोगिता, वाद-विवाद प्रतियोगिता और अन्‍य स्‍पर्धाएं भी आयोजित की जा रही है. इस वर्ष राज्‍य के सभी सरकारी विभाग अपने पत्र-व्‍यवहार में चौरी-चौरा शताब्‍दी के प्रतीक चिन्‍ह का उपयोग करेंगे.

एक अनोखी पहल के तहत गोरखपुर डिविजन के सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्‍त स्‍कूलों के छात्रों को चौरी-चौरा शहीद स्‍मारक और अन्‍य स्‍मारकों को दिखाने के लिए ले जाया जाएगा.

स्‍वतंत्रता संग्राम में चौरी-चौरा घटना: एक दृष्टि

  • स्‍वतंत्रता संग्राम में चौरी-चौरा घटना 4 फरवरी 1922 को ब्रिटिश इंडिया के संयुक्‍त प्रांत में हुई थी, जिसे अब उत्‍तर प्रदेश कहा जाता है.
  • गौरखपुर जिले का चौरी-चौरा नामक नाम तब सुर्खियों में आया जब ब्रिटिश पुलिस के अत्‍याचार के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस थाने पर हमला किया और थाने की इमारत में आग लगा दी जिससे उसके अंदर मौजूद सभी लोग मारे गए.
  • इस घटना में तीन नागरिकों और 23 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी. महात्‍मा गांधी हिंसा कड़ा विरोध करते थे इसलिए उन्‍होंने इस घटना के बाद 12 फरवरी 1922 को राष्‍ट्रीय स्‍तर पर चल रहे असहयोग आंदोलन को स्‍थगित करने की घोषणा कर दी.
  • चौरी-चौरा घटना पर गांधी को दुख पहुंचा और वो पांच दिन के उपवास पर चले गए. गांधी जी ने महसूस किया कि जनता को हिंसात्मक हमलों के मद्देनजर सयंम बरतने का पर्याप्‍त प्रशिक्षण नहीं दिया गया था.

4 फरवरी: विश्व कैंसर दिवस, विश्व कैंसर दिवस 2021 की थीम

प्रत्येक वर्ष 4 फ़रवरी को विश्व कैंसर दिवस (World Cancer Day) मनाया जाता है. यह दिवस कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इस रोग के प्रति लोगों को शिक्षित करने के उद्देश्य से दुनिया भर में मनाया जाता है.

विश्व कैंसर दिवस की शुरुआत यूनियन फॉर इंटरनेशनल कैंसर कंट्रोल (UICC) के द्वारा की गयी थी. 4 फरवरी 2000 को कैंसर के खिलाफ पेरिस में विश्व कैंसर सम्मेलन हुआ जहां यह तय हुआ कि हर साल चार फरवरी को कैंसर के खिलाफ जागरुकता फैलाने के लिए इस दिवस को मनाया जाएगा.

विश्व कैंसर दिवस 2021 की थीम

विश्व कैंसर दिवस को एक थीम, अभियान के साथ मनाया जाता है. पहले इस दिवस पर हर साल एक नयी थीम हुआ करती थी, लेकिन 2016 से हर तीन साल एक ही थीम रखने का फैसला लिया गया. वर्ष (2019-2021) अभियान की थीम ‘मैं हूं और मैं रहूंगी/रहूंगा’ (I Am and I Will) है.

हर साल 76 लाख लोगों की कैंसर से मौत

कैंसर बेहद खतरनाक एवं जानलेवा बीमारी है. दुनियाभर में इस बीमारी से सबसे ज्यादा मौतें होती हैं. वर्तमान में, विश्व में हर साल लगभग 76 लाख लोगों की मौत कैंसर से होती है. इनमें से लगभग 40 लाख लोगों की मौत समय से पहले हो जाती है. वर्ष 2025 तक, कैंसर के कारण समय से पहले होने वाली मौतों की संख्या बढ़कर प्रति वर्ष 60 लाख होने का अनुमान है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वर्ष 2025 तक कैंसर के कारण समय से पहले होने वाली मौतों में 25 प्रतिशत कमी का लक्ष्य रखा है. WHO ने चेतावनी दी है कि 2040 तक कम और मध्‍यम आय वाले देशों में कैंसर के मामले 81 प्रतिशत तक बढ़ जायेंगे क्‍योंकि वहां रोकथाम और देखभाल के लिए निवेश का अभाव है.

भारत में हर साल 7 लाख लोगों की मौत कैंसर से होती है. यहाँ 40 फीसद कैंसर सिर्फ तंबाकू के सेवन से होता है. पुरुषों में सबसे ज्यादा फेफड़े के कैंसर और महिलाओं में स्तन कैंसर का जोखिम रहता है.

कैंसर से बचाव

कैंसर से बचाव संतुलित भोजन, साफ-सफाई, नियमित व्यायाम और ध्रुमपान से दूर रहकर किया जा सकता है. कैंसर के मामलों में मौत की सबसे बड़ी वजह देर से ईलाज शुरु करना माना जाता है.

पंडित भीमसेन जोशी का जन्म शताब्दी समारोह

भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान विद्वान पंडित भीमसेन जोशी का के जन्मदिन 4 फरवरी से शताब्दी समारोह मनाया जा रहा है. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इस समारोह की शुरुआत की थी.

पंडित भीमसेन जोशी: एक दृष्टि

किराना घराने से जुड़े भीमसेन जोशी ने खयाल तर्ज़ के संगीत को देश-विदेश में लोकप्रिय बनाया था. वर्ष 1941 में भीमसेन जोशी ने 19 वर्ष की उम्र में मंच पर अपनी पहली प्रस्तुति दी थी. उन्हें वर्ष 1998 में संगीत नाटक अकादमी फैलोशिप से सम्मानित किया गया था.

भीमसेन जोशी को 2009 में भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया था. उन्हें 1972 में पद्म श्री, 1985 में पद्म भूषण, और 1999 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था. उनका निधन 24 जनवरी 2011 को हुआ था.