भारत की नई बाघ और हाथी संरक्षण रिपोर्ट 2026 का मसौदा जारी

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने 30 मार्च 2026 को  भारत की ‘नई बाघ और हाथी संरक्षण रिपोर्ट 2026’ का मसौदा (Draft) जारी किया था.

यह रिपोर्ट भारत के वन्यजीव इतिहास में बहुत खास है, क्योंकि यह ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ (1973) और ‘प्रोजेक्ट एलीफेंट’ (1992) के हालिया ऐतिहासिक विलय (Merger) के बाद जारी की गई पहली संयुक्त निगरानी रिपोर्ट है. अब इन दोनों बड़े कार्यक्रमों को मिलाकर ‘प्रोजेक्ट टाइगर एंड एलीफेंट डिवीजन’ (PT and E Division) बना दिया गया है.

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु

  • रिपोर्ट में मानव-वन्यजीव संघर्ष (HWC) को कम करने के लिए जंगलों के किनारे और गांवों की सीमाओं पर ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) आधारित थर्मल कैमरों के इस्तेमाल पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है.
  • ये AI कैमरे रात के अंधेरे में भी हाथियों के झुंड या बाघ के इंसानी बस्तियों की तरफ बढ़ने पर वन विभाग और स्थानीय लोगों के मोबाइल पर तुरंत अलर्ट भेज देते हैं, जिससे जान-माल का नुकसान टाला जा सके.
  • इस रिपोर्ट ने सिर्फ जानवरों की गिनती करने के बजाय रिज़र्व जंगलों की ‘कैरिंग कैपेसिटी’ (यानी एक जंगल अपने संसाधनों के आधार पर अधिकतम कितने बाघों या हाथियों का भरण-पोषण कर सकता है) का आकलन करने पर ध्यान केंद्रित किया है.
  • जानवरों के सुरक्षित आवागमन और जेनेटिक विविधता बनाए रखने के लिए देशभर में पहचाने गए 150 से अधिक ‘एलीफेंट कॉरिडोर’ और टाइगर रिज़र्व को जोड़ने वाले गलियारों को अतिक्रमण मुक्त करने की सख्त रणनीति पेश की गई है.
  • रिपोर्ट मानती है कि जंगलों के बीच से गुजरने वाले हाईवे और रेलवे ट्रैक हाथियों और बाघों की मौत का एक बड़ा कारण हैं. इसे रोकने के लिए भविष्य की सभी विकास परियोजनाओं में ‘एनिमल अंडरपास’ या ‘इको-ब्रिज’ (जानवरों के पुल) बनाना अनिवार्य करने की सिफारिश की गई है.

प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट एलीफेंट का विलय

  • भारत सरकार द्वारा ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ और ‘प्रोजेक्ट एलीफेंट’ का आधिकारिक रूप से विलय 23 जून 2023 को किया गया था.
  • इन दोनों प्रमुख वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रमों को मिलाकर केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के तहत एक नया प्रभाग ‘प्रोजेक्ट टाइगर एंड एलीफेंट डिवीजन’ (PT&E Division) स्थापित किया गया है.
  • भारत के अधिकांश जंगलों में बाघ और हाथी एक ही प्राकृतिक आवास को साझा करते हैं. इस विलय का मुख्य उद्देश्य दोनों के लिए बजट के आवंटन को सुव्यवस्थित करना, प्रशासनिक कार्यों का दोहराव रोकना और प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक व प्रभावी बनाना है.
  • रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि भारत के अधिकांश (लगभग 60-70%) टाइगर रिज़र्व और एलीफेंट रिज़र्व एक ही भौगोलिक क्षेत्र में आते हैं (जैसे कॉर्बेट, बांदीपुर, काजीरंगा आदि).
  • भारत में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ की शुरुआत वर्ष 1973 में हुई थी, जबकि ‘प्रोजेक्ट एलीफेंट’ को वर्ष 1992 में शुरू किया गया था.