प्रधानमंत्री ने 13 सितम्बर को असम के गुवाहाटी में भूपेन हजारिका की जन्मशती समारोह में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. श्री मोदी ने उन्हें एकता और राष्ट्रीय अखंडता का प्रतीक बताया.
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर एक सौ रुपये के स्मारक सिक्के का अनावरण किया और 21 भाषाओं में भूपेन हजारिका की जीवनी का विमोचन भी किया.
भूपेन हजारिका (8 सितंबर 1926 – 5 नवम्बर 2011)
भूपेन हाजरिका भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम से एक बहुमुखी प्रतिभा के गीतकार, संगीतकार और गायक थे। इसके अलावा वे असमिया भाषा के कवि, फिल्म निर्माता, लेखक और असम की संस्कृति और संगीत के अच्छे जानकार भी रहे थे।
वे भारत के ऐसे विलक्षण कलाकार थे जो अपने गीत खुद लिखते थे, संगीतबद्ध करते थे और गाते थे.
उन्हें दक्षिण एशिया के श्रेष्ठतम जीवित सांस्कृतिक दूतों में से एक माना जाता है.
‘मोई एति जजाबोर’ (Moi Eti Jajabor) डॉ. भूपेन हजारिका की एक आत्मकथा है, जिसका अर्थ है ‘मैं एक यात्री हूं’. यह असमिया भाषा की एक उत्कृष्ट साहित्यिक कृति है, जिसे भूपेन हजारिका ने स्वयं लिखा है.
पुरस्कार और सम्मान
भूपेन हजारिका को 1992 में सिनेमा जगत के सर्वोच्च पुरस्कार दादा साहब फाल्के सम्मान से सम्मानित किया गया.
उन्हें 2009 में असोम रत्न, 2011 में पद्म भूषण जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया.
उन्हें मरणोपरांत 2012 में भारत के दूसरे सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण और 2019 में भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया.