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मई माह का प्रथम मंगलवार: विश्‍व अस्थमा दिवस

प्रत्येक वर्ष मई माह के पहले मंगलवार को ‘विश्‍व अस्थमा दिवस’ (World Asthma Day) मनाया जाता है. इस वर्ष यानी 2021 में यह दिवस 4 मई को मनाया गया. अस्थमा के प्रति जागरूकता एवं शिक्षा हेतु यह दिवस संपूर्ण विश्व में मनाया जाता है.

विश्व अस्थमा दिवस 2021 का विषय

विश्व अस्थमा दिवस 2021 का मुख्य विषय (थीम)- ‘अस्थमा की गलत धारणा को उजागर करना’ (Uncovering Asthma Misconceptions) है.

विश्‍व अस्थमा दिवस का इतिहास

इस दिवस का आयोजन Global Initiative for Asthma (GINA) द्वारा किया जाता है. पहली बार विश्व अस्थमा दिवस वर्ष 1998 में स्पेन के बार्सिलोना में आयोजित पहली विश्व अस्थमा बैठक में मनाया गया था.

अस्थमा क्या है?

अस्थमा को दमा के तौर पर भी जाना जाता है. यह फेफड़ों के वायुमार्ग में सूजन-संबंधी एक लंबे समय तक रहने वाला रोग है. अस्थमा के मरीज को सांस लेने में परेशानी होती है, बहुत ही जल्द सांस फूल जाता है. अस्थमा के सामान्य लक्षणों में घरघराहट, खांसी, सीने में जकड़न और सांस की तकलीफ शामिल हैं.

4 मई: अन्तर्राष्ट्रीय अग्निशमन दिवस

प्रत्येक वर्ष 4 मई को दुनिया भर में अन्तर्राष्ट्रीय अग्निशमन दिवस (International Firefighters’ Day) मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य उन फायर फाइटरों को सम्मान देना है, जो अपनी जान दांव पर लगाकर लोगों और वन्य जीवों की जान आग से बचाते हैं.

इस दिन यूरोप में दोपहर के समय 30 सेकंड तक फायर बिग्रेड के सायरन बजाए जाते हैं. इसके बाद एक मिनट के लिए मौन रखा जाता है, जिसमें फायर फायटरों को सम्मान और धन्यवाद दिया जाता है.

अंतरराष्ट्रीय अग्निशमन दिवस का प्रतीक

अंतरराष्ट्रीय अग्निशमन दिवस का प्रतीक ‘लाल और नीले रंग के दो रिबन’ हैं. जिसमें लाल रंग आग को, और नीला रंग पानी को दर्शाता है.

अंतरराष्ट्रीय अग्निशमन दिवस का इतिहास

अंतरराष्ट्रीय अग्निशमन दिवस को पहली बार 1999 में मनाया गया था, जब ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया स्थित लिंटन की झाड़ियों में आग लगी थी. इस आग को बुझाने गई टीम के पांच सदस्यों की झुलसकर मौत हो गई थी.

अंतरराष्ट्रीय अग्निशमन दिवस के रूप में 4 मई को चुने जाने का मुख्य वजह संत फ्लोरिन (Saint Florian) हैं, जो कि एक संत और फायर फाइटर थे. संत फ्लोरिन की मृत्यु 4 मई को हुई थी. संत फ्लोरिन रोमन बटालियन के कमांडिंग फायरफाइटर्स में से एक था. उन्होंने प्राचीन रोम में एक पूरा जलता हुआ गाँव बचा लिया था.

3 मई: विश्‍व प्रेस स्‍वतंत्रता दिवस

प्रत्येक वर्ष 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस (World Press Freedom Day) मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य दुनिया भर में प्रेस की स्वतंत्रता का मूल्यांकन करना और मीडिया की स्वतंत्रता की रक्षा तथा ड्यूटी के दौरान हमले में जान गंवाने वाले पत्रकारों को श्रद्धांजलि अर्पित करना है.

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस 2021 का विषय

इस वर्ष यानी 2021 में विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस का मुख्य विषय (थीम)- ‘सूचना से जनकल्‍याण जो जनहित कार्यों में सूचना के महत्‍व को दर्शाता है’.

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस का इतिहास

1991 में यूनेस्को की सिफारिश के बाद, संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने दिसंबर 1993 में विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस की घोषणा की थी.

प्रेस स्वतंत्रता: मुख्य तथ्य

भारत में एक लोकतान्त्रिक देश है, यहाँ प्रेस (मीडिया) को पूर्ण स्‍वतंत्रता है. भारत में प्रेस की स्वतंत्रता भारतीय संविधान के अनुच्छेद-19 में भारतीयों को दिए गए अभिव्यक्ति की आजादी के मूल अधिकार से सुनिश्चित होती है.

मई माह का प्रथम रविवार: विश्व हास्य दिवस

प्रत्येक वर्ष मई महीने के पहले रविवार को ‘विश्व हास्य दिवस’ (World Laughter Day) मनाया जाता है. इस वर्ष यानी 2021 में यह दिवस 2 मई को मनाया गया. विश्व हास्य दिवस का आरंभ संसार में शांति की स्थापना और भाई-चारे और सदभाव के उद्देश्य से हुई.

विश्व हास्य दिवस की शुरुआत डॉ. मदन कटारिया ने 11 जनवरी 1998 को मुंबई में की थी. मदन कटारिया विश्व हास्य-योग आंदोलन के संस्थापक थे.

हास्य-योग के अनुसार, हास्य सकारात्मक और शक्तिशाली भावना है जिसमें व्यक्ति को ऊर्जावान और संसार को शांतिपर्ण बनाने के सभी तत्व उपस्थित रहते हैं. यह व्यक्ति के विद्युत-चुंबकीय क्षेत्र को प्रभावित करता है और व्यक्ति में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है.

1 मई: अंतर्राष्‍ट्रीय श्रमिक दिवस

प्रत्येक वर्ष 1 मई को अंतर्राष्‍ट्रीय श्रमिक दिवस (International Workers’ Day) के रूप में मनाया जाता है. इसे मई दिवस (May Day) या मजदूर दिवस (Labour Day) के रूप में भी जाना जाता है. इस दिन को मजदूरों के योगदान के सम्‍मान के रूप में मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संघों को प्रोत्साहन और बढ़ावा देना है.

मजदूर दिवस का इतिहास

अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मज़दूर दिवस मनाने की शुरुआत 1 मई, 1886 को हुई थी. उस दिन अमरीका के मज़दूर संघों ने मिलकर निश्चय किया कि वे रोज़ाना 8 घंटे से ज्यादा काम नहीं करेंगे. इसके लिए मज़दूर संघों ने हड़ताल की. इस दौरान शिकागो की हेमार्केट में बम विस्फोट के बाद पुलिस की गोलीबारी में कई मज़दूरों की जान गई.

1889 में अन्तर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन में घोषणा की गई कि हेमार्केट में मारे गये निर्दोष लोगों की याद में 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जाएगा और इस दिन सभी कामगारों तथा श्रमिकों का अवकाश रहेगा.

भारत के सन्दर्भ में मजदूर दिवस

भारत में लेबर किसान पार्टी ऑफ हिन्दुस्तान ने 1 मई, 1923 को इसकी शुरूआत की थी. हालांकि उस समय इसे मद्रास दिवस के रूप में मनाया जाता था लेकिन अब दुनिया के अन्य देशों की तरह इसे मई दिवस के रूप में ही मनाया जाता है.

1 मई 2021: महाराष्ट्र और गुजरात का 61वां स्थापना दिवस

महाराष्ट्र और गुजरात प्रत्येक वर्ष 1 मई को अपना स्थापना दिवस (Maharashtra Day and Gujarat Day) मनाते हैं. 1960 में इसी दिन मराठी एवं गुजराती भाषियों के बीच संघर्ष के कारण बम्बई राज्य (बांबे स्टेट) का बंटवारा करके महाराष्ट्र एवं गुजरात नामक दो राज्यों की स्थापना की गई थी. इस वर्ष यानी 2021 में दोनों राज्यों ने 61वां स्थापना दिवस मनाया.

भारत के संसद ने बांबे स्टेट को गुजरात और महाराष्ट्र में विभाजित करने के लिए ‘बॉम्बे पुनर्गठन अधिनियम 1960’ पारित किया था. यह अधिनियम 1 मई 1960 को लागू हुआ था. अधिनियम के तहत जहाँ लोग गुजराती और कच्छी बोलते थे उस क्षेत्र में गुजरात का गठन किया गया. दूसरे क्षेत्र का नाम महाराष्ट्र रखा गया था जहां लोग कोंकणी और मराठी बोलते थे.

भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन

  1. 1960 से महाराष्ट्र एवं गुजरात ‘बांबे स्टेट’ का हिस्सा हुआ करते थे. बॉम्बे में मराठी और गुजराती दोनों भाषाएं बोली जाती थीं. धीरे-धीरे दोनों भाषाओं के लोगों के बीच अलग राज्य की मांग उठने लगी.
  2. 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत कई राज्यों का गठन किया गया. इस अधिनियम के अंतर्गत तेलुगु बोलने वालों को आंध्र प्रदेश, कन्नड़ भाषी लोगों के लिए कर्नाटक राज्य बना, वहीं मलयालम बोलने वालों के लिए केरल और तमिल भाषी लोगों के लिए तमिलनाडु बना.
  3. 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम में बॉम्बे के मराठी और गुजराती लोगों को अलग राज्य नहीं मिला. गुजराती और मराठी लोगों ने अलग राज्य की मांग के लिए बॉम्बे में आंदोलन करना शुरू कर दिया.
  4. 1 मई 1960 को बॉम्बे को बांटकर दो राज्य महाराष्ट्र और गुजरात बना दिए गए. अब दोनों राज्य बॉम्बे को अपने राज्य का हिस्सा बनाना चाहते थे. काफी खींचातान के बाद बॉम्बे को महाराष्ट्र की राजधानी बना दिया गया.