जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक 2026 संसद में पारित
भारतीय संसद ने हाल ही में जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक (Jan Vishwas Amendment of Provisions Bill) 2026 पारित किया है. राज्यसभा ने इसे 2 मार्च को जबकि लोकसभा ने को 1 मार्च को मंजू़री दी थी.
इस विधेयक को सरकार के ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (व्यापार करने में आसानी) और ‘ईज ऑफ लिविंग’ (जीवन जीने की सुगमता) अभियान के सबसे बड़े कानूनी सुधारों में से एक माना जा रहा है.
विधेयक का मुख्य उद्देश्य
- भारत में दशकों से ऐसे कई कानून थे जिनमें छोटी-छोटी प्रक्रियात्मक (Procedural) गलतियों, फॉर्म भरने में हुई भूल या देरी के लिए भी नागरिकों और व्यापारियों को जेल की सजा हो सकती थी.
- इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य इसी औपनिवेशिक मानसिकता और इंस्पेक्टर राज को खत्म करना है. यह विधेयक छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करता है और जेल की सजा की जगह केवल आर्थिक जुर्माना या चेतावनी का प्रावधान करता है.
विधेयक का दायरा और मुख्य आंकड़े
- यह विधेयक 23 केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा प्रशासित कुल 79 केंद्रीय अधिनियमों (Central Acts) में संशोधन करता है.
- इसके तहत कुल 784 प्रावधानों में संशोधन किया गया है. इन 784 में से 717 प्रावधानों को ‘व्यापार करने में आसानी’ (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने के लिए अपराधमुक्त किया गया है, जबकि 67 प्रावधानों में ‘जीवन जीने की सुगमता’ (Ease of Living) को बेहतर बनाने के लिए संशोधन किया गया है.
- कुल मिलाकर लगभग 1,000 से अधिक छोटी-मोटी गलतियों और अपराधों को तर्कसंगत (Rationalize) बनाया गया है.
विधेयक के मुख्य बिन्दु
- सैकड़ों मामलों में जेल की सजा को पूरी तरह से हटा दिया गया है और उसकी जगह केवल आर्थिक जुर्माना तय किया गया है.
- कई कानूनों में पहली बार हुई छोटी गलती पर सीधे जुर्माना या सजा देने के बजाय चेतावनी (Warning) देने का प्रावधान किया गया है.
- अदालतों से बोझ कम करने के लिए, इन छोटे मामलों को निपटाने की शक्ति ‘न्यायिक अधिकारियों’ के बजाय ‘प्रशासनिक अधिकारियों’ (Adjudicating Officers) को दी गई है.
संशोधन से प्रभावित होने वाले कुछ प्रमुख कानून
- दवा और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 (Drugs and Cosmetics Act): खुदरा विक्रेताओं से जुड़ी कुछ विशिष्ट प्रक्रियात्मक चूकों के लिए अब जेल नहीं होगी, बल्कि श्रेणीबद्ध जुर्माना लगेगा. हालांकि, सार्वजनिक स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले गंभीर मामलों में कड़ी सजा बरकरार है.
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988: ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यूअल में देरी या छोटे-मोटे ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन में अब सीधे गिरफ्तारी या एफआईआर का डर खत्म किया गया है.
- इसके अलावा, लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट, चाय अधिनियम, दिल्ली नगर निगम अधिनियम (MCD Act) और अंग्रेजों के जमाने के कैटल ट्रेसपास एक्ट (Cattle Trespass Act) जैसे कई कानूनों में संशोधन किए गए हैं.
दूरगामी लाभ
- अदालतों का बोझ कम होगा: प्रशासनिक स्तर पर मामलों के निपटारे से भारतीय अदालतों में लंबित लाखों छोटे मुकदमों में भारी कमी आएगी.
- एमएसएमई (MSMEs) को राहत: छोटे और मध्यम व्यापारियों को बिना वजह अदालतों और वकीलों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, जिससे निवेश और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा मिलेगा.
- विश्वास-आधारित शासन: यह नागरिकों को हर बात पर शक करने और दंडित करने की पुरानी व्यवस्था को बदलकर राज्य और नागरिकों के बीच ‘भरोसे’ का रिश्ता कायम करता है.
