स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट INS तारागिरी को विशाखापत्तनम में बेडे़ में शामिल

स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट ‘INS तारागिरी’ (INS Taragiri)  को 3 मार्च को विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना के बेडे़ में शामिल (Commission) किया गया. इस युद्धपोत का जलावतरण रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया. इस युद्धपोत से जुड़ी सभी प्रमुख जानकारियाँ इस प्रकार हैं:

प्रोजेक्ट 17A (Project 17A & Construction)

  • INS तारागिरी ‘प्रोजेक्ट 17A’ (नीलगिरि-क्लास) के तहत बनाया गया चौथा स्टेल्थ फ्रिगेट है. यह पुराने शिवालिक-क्लास फ्रिगेट्स का एक उन्नत और आधुनिक संस्करण है.
  • इसका डिज़ाइन भारतीय नौसेना के ‘वॉरशिप डिज़ाइन ब्यूरो’ (WDB) द्वारा तैयार किया गया है और इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा किया गया है.
  • इस विशाल युद्धपोत का विस्थापन (Displacement) लगभग 6,670 टन है.

प्रमुख तकनीक और मारक क्षमताएं

  • तारागिरी की सबसे बड़ी खासियत इसकी ‘स्टेल्थ’ (छिपने की) क्षमता है. इसकी बाहरी बनावट (रडार क्रॉस-सेक्शन) को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि यह दुश्मन के रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आता.
  • यह युद्धपोत सुपरसोनिक ब्रह्मोस (BrahMos) सतह-से-सतह पर मार करने वाली मिसाइलों, मध्यम दूरी की सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलों और उन्नत पनडुब्बी रोधी (Anti-submarine) युद्ध प्रणालियों से लैस है.
  • इसमें ‘संयुक्त डीजल या गैस’ (CODOG) इंजन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे समुद्र में उच्च गति (High-speed) और लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता प्रदान करता है.
  • ऐसे समय में जब हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक चुनौतियां बढ़ रही हैं, तारागिरी की तैनाती भारत की समुद्री सीमाओं को अभेद्य बनाएगी.

आत्मनिर्भर भारत का उत्कृष्ट प्रतीक

  • इस युद्धपोत में 75% से अधिक उपकरण और प्रणालियां पूरी तरह से स्वदेशी हैं, जिन्हें देश के 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के सहयोग से तैयार किया गया है.
  • तारागिरी के निर्माण में इस्तेमाल हुआ लगभग 4,000 टन विशेष श्रेणी का स्टील ‘स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड’ (SAIL) के बोकारो, भिलाई और राउरकेला स्थित प्लांटों में तैयार किया गया है.