आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2026 संसद में पारित
भारतीय संसद ने हाल ही में ‘आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2026’ (Andhra Pradesh Reorganisation (Amendment) Bill, 2026) पारित किया था.
इस विधेयक ने आंध्र प्रदेश की राजधानी को लेकर पिछले 12 वर्षों से चली आ रही राजनीतिक अनिश्चितता को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है. इस विधेयक से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां नीचे दी गई हैं:
विधेयक के मुख्य उद्देश्य
- इस विधेयक का उद्देश्य ‘अमरावती’ (Amaravati) को आंध्र प्रदेश की एकमात्र, स्थायी और वैधानिक राजधानी (Sole and Permanent Capital) के रूप में आधिकारिक मान्यता देना है.
- यह विधेयक राज्य में ‘तीन राजधानियों’ (Three-capital model) के किसी भी भविष्य के विचार को कानूनी रूप से अस्वीकार करता है.
प्रमुख कानूनी संशोधन
- यह विधेयक मूल ‘आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014’ (जिसके तहत तेलंगाना अलग राज्य बना था) में महत्वपूर्ण संशोधन करता है.
- 2014 के मूल अधिनियम की धारा 5(2) में संशोधन कर अमरावती को राज्य की राजधानी बनाया गया है.
- विधि और न्याय मंत्रालय की राजपत्र (Gazette) अधिसूचना के अनुसार, इस कानून को 2 जून 2024 से लागू माना जाएगा. 2 जून 2024 को ही हैदराबाद के संयुक्त राजधानी रहने की 10 वर्ष की समय सीमा समाप्त हुई थी.
संशोधन की आवश्यकता क्यों?
- 2014 में आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद, ‘हैदराबाद’ को 10 वर्षों (जून 2024 तक) के लिए तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की संयुक्त राजधानी बनाया गया था.
- 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने ‘अमरावती’ को नई ग्रीनफील्ड राजधानी के रूप में चुना था और इसका शिलान्यास किया गया था.
तीन राजधानी विवाद
2019 में वाई.एस.आर. कांग्रेस पार्टी (YSRCP) की सरकार आने के बाद उन्होंने विकेंद्रीकरण के नाम पर तीन राजधानियों का प्रस्ताव रखा था:
- विशाखापत्तनम (कार्यकारी राजधानी)
- अमरावती (विधायी राजधानी)
- कुरनूल (न्यायिक राजधानी)
इस 3-राजधानी विवाद को सुलझाने के लिए 28 मार्च 2026 को आंध्र प्रदेश विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से अमरावती को संवैधानिक दर्जा देने की मांग की थी.
